20वीं शताब्दी के राष्ट्रीय आन्दोलन part 2 II सामान्य अध्ययन GK

20वीं शताब्दी के राष्ट्रीय आन्दोलन part 2


  1. दिसम्बर, 1916 में लखनऊ में मुस्लिम लीग और कांग्रेस दोनों ने वार्षिक अधिवेशन का आयोजन किया.
  2. चम्पारण में गाँधी जी के सहयोगी राजेन्द्र प्रसाद, महादेव देसाई, जे.बी. कृपलानी, मजहरुल हक, नरहरि पारिख व वृज किशोर थे.
  3. असहयोग आन्दोलन के समय महात्मा गाँधी ने ‘कैसर-ए-हिन्द’ की उपाधि वापस कर दिया. जमना लाल बजाज ने ‘राय बहदुर’ की उपाधि वापस कर दी.
  4. ‘पंजाब हिन्दू सभा’ 1909 ई. में स्थापित किया गया था. इसके नेता, यू. एन. मुखर्जी और लाल चन्द ने हिन्दू सांप्रदायिक विचार-धारा और राजनीती की नींव रखी.
  5. हिन्दू महासभा की स्थापना की स्थापना 1915 ई. में हरिद्वार में पं. मदन मोहन मालवीय ने की थी.
  6. पजाबी में भूस्वामी वर्गों के हितों की रक्षा के लिए यूनियनिस्ट पार्टी का गठन किया गया.
  7. अकाली आन्दोलन (1922 ई.-1927 ई.) का लक्ष्य सिक्ख गुरुद्वारे को ब्रिटिश समर्थक एवं भ्रष्ट आनुवांशिक महंतों के चंगुल से मुक्त करना था.
  8. खिलाफत आन्दोलन प्रारंभ करने के लिए गठित खिलाफत कमेटी में शौकत अली, मुहम्मद अली, अबुल कलाम आजाद, हकीम अजमल खान, हसरत मोहानी तथा डॉ. अंसारी शामिल थे. तथापि खिलाफत आन्दोलन प्रारंभ करने का श्रेय मुख्यतः अली बंधुओं-शौकत अली एवं मुहम्मद अली को दिया जाता है. हाजी शरियतुल्ला 19वीं शती के फरायजी आन्दोलन के संस्थापक थे.
  9. 7 अगस्त, 1942 को बंबई के ऐतिहासिक ग्वालिया टैंक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की वार्षिक हुई जिसमें वर्धा प्रस्ताव (भारत छोड़ो) की पुष्टि हुई. थोड़े बहुत संशोधन के बाद 8 अगस्त, 1942 प्रस्ताव स्वीकार कर दिया गया और भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के तहत अंग्रेजों के विरुद्ध ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ प्रारंभ करने की घोषणा की गई. 9 अगस्त, 1942 को भारत छोड़ो आन्दोलन आरंभ हुआ. आन्दोलन आरंभ होते ही आपरेशन जीरो आवर के तहत गाँधी जी तथा अन्य चोटी के कांग्रेस नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया. गाँधी जी को गिरफ्तार कर सरोजनी नायडू सहित पूना के आगा खां पैलेस में रखा गया. 1942 के आन्दोलन का सर्वाधिक प्रभाव बंबई, बंगाल, बिहार, उड़ीसा, यूपी. एवं मद्रास में था लेकिन समूचे देश की हिस्सेदारी इसमें अवश्य थी.
  10. बाल गंगाधर तिलक को सर वैलेटाइन शिरोल ने ‘अशांति का जन्मदाता’ कहा था. तिलक शिरोल पर मानहानि का मुकदमा चलाने के उद्देश्य से इंग्लैण्ड गए थे. यद्दपि वे मुकदमा हार गए, किन्तु इसका उचित प्रभाव हुआ.
  11. आजाद हिन्द फ़ौज का गठन 4 जुलाई, 1943 को सुभाष चन्द्र बोस के नेतृत्व में किया था. फ़ौज गठन सिंगापुर द्वीप पर किया गया था किन्तु तब सिंगापुर द्वीप ‘ब्रिटिश मलय’ का अंग था. ब्रिटिश मलय में शामिल 3 भाग थे –
क.  फेडरेटेड मलय
ख. अनफेडरेटेड मलय
ग.   स्ट्रेटस सेटलमेंट तृतीय यानी स्ट्रेट्स सेटलमेंट के अंतर्गत 4 अलग-अलग क्षेत्रों को जोड़ा गया था जो इस प्रकार हैं :
क.    मलक्का – वर्तमान में मलेशिया के पेराक राज्य का एक जिला है.
ख.      पेनांग – वर्तमान में मलेशिया का एक राज्य है.
ग.     सिंगापुर – अगस्त, 1963 में स्वतंत्र की घोषणा की, 16 सितम्बर, 1963 को मलेशिया का अंग बना, 9 अगस्त, 1965 को मलेशिया की संसद के एक प्रस्ताव द्वारा मलेशिया संघ से अलग कर दिया गया. इसी दिन से स्वतंत्र देश बना. स्पष्ट है कि जब सिंगापुर में आजाद हिन्द फ़ौज का गठन हुआ तब वह मलाया का हिस्सा था.
  1. 1937 ई. में विजयलक्ष्मी पंडित संयुक्त प्रान्त की प्रांतीय विधान सभा के लिए निर्वाचित हुई और स्थानीय स्वशासन और सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री के पद पर नियुक्त की गई. वह कैबिनेट मंत्री के पद पर नियुक्त की गई. वह कैबिनेट मंत्री बनने वाली प्रथम भारतीय महिला था.
  2. विजय लक्ष्मी पंडित सोवियत संघ के लिए स्वतंत्र भारत की पहली राजदूत बनी.
  3. 1953 ई. में संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष बनने वाली वह विश्व की पहली महिला थी.
  4. भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री पं. जवाहर लाल नेहरू की बहन थी.
  5. 1918 में गुजरात के खेड़ा में किसानों की फसल नष्ट हो जाने के बाद भी सरकार ने लगान में छुट नहीं दी थी. और भू-राजस्व उगाही स्थगित नहीं थी. इसी मुद्दे पर महात्मा गाँधी ने खेड़ा के किसान के पक्ष में सत्याग्रह संघटित किया था. खेड़ा आन्दोलन प्लेग फैलने और अकाल पड़ने के कारण किसानों के लगान अदा करने में असमर्थ होने और राज्य के प्रति उनमें असंतोष होने के परिणामस्वरूप हुआ था.
  6. 1938 के कांग्रेस के हरिपुर (गुजरात) अधिवेशन में सुभाष चन्द्र बोस कांग्रेस के पहली बार अध्यक्ष (निर्विरोध) बने थे. 1939 के त्रिपुरी अधिवेशन के दूसरी बार अध्यक्ष बने, परन्तु कार्यकारिणी के गठन के प्रश्न पर गाँधीजी से मतभेद के कारण उन्होंने त्यागपत्र दे दिया जिसके बाद डॉ. राजेन्द्र प्रसाद कांग्रेस के अध्यक्ष बने.  
  7. सर सैय्यद अहमद खां ने कहा था कि ‘हिन्दू और मुसलमान भारत की दो आँखों है’. उनके अनुसार हिन्दू और मसलमान हिन्दुस्तान रूपी खुबसूरत दुल्हन की दो आँखें हैं. उनमें से किसी एक की कमजोरी ‘दुल्हन’ की सुदंरता को खराब कर देती है.
  8. सर सैय्यद अहमद खां ने एक पत्रिका तहजीब-उल-अखलाक (सभ्यता और नैतिकता) फ़ारसी भाषा में निकाली.
  9. 1864 ई. में कलकत्ता में सेंटीफिक सोसाइटी की स्थापना की.
  10. 1875 ई. में अलीगढ़ में मुहम्डन एंग्लो-ओरिएंटल स्कूल की स्थापना की. यह 1978 ई. में कालेज बन गया और 1920 ई. में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में परिवर्तित हो गया.
  11. पूर्वी बंगाल के लेफ्टिनेंट गर्वनर वैमफील्ड फुलर ने बंगाल विभाजन (1905 ई.) पर मुसलमानों को अपनी ‘चहेती पत्नी’ के रूप में उल्लिखित किया.
  12. 20 जुलाई, 1905 को विभाजन का निर्णय लिया गया जो 16 अक्टूबर, 1905 से प्रभावी हो गया.
  13. स्वदेशी आन्दोलन के समय टैगोर ने ‘आमार सोनार बंगला’ नामक गीत लिखा जो 1971 ई. में बांग्लादेश का राष्ट्रीय गान बना.
  14. महात्मा गाँधी ने लिखा की ‘भारत का वास्तविक जागरण बंगाल विभाजन’ के उपरांत शुरू हुआ.
  15. गाँधी जी द्वारा असहयोग आन्दोलन 1 अगस्त, 1920 को प्रारंभ किया गया. पश्चिमी भारत, बंगाल और उत्तरी भारत में असहयोग आन्दोलन को अभूतपूर्व सफलता मिली. असहयोग आन्दोलन के दौरान ही मोतीलाल नेहरू, लाल लाजपत राय, सरदार वल्लभभाई पटेल, जवाहरलाल नेहरू और राजेन्द्र प्रसाद न्यायालय बहिष्कार कर आन्दोलन में कूद पड़े थे.
  16. भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान बंबई केविभिन्न भागों से कांग्रेस का गुप्त रेडियो प्रसारित किया जाता था, जिसे मद्रास तक सुना जा सकता था. राम मनोहर लोहिया नयमित रूप से इस रेडियो पर प्रसारण करते थे. उषा मेहता कांग्रेस के भूमिगत रेडियो का संचालन करने वाले छोटे से दल की एक महत्वपूर्ण सदस्यता थीं.
  17. सी. राजगोपालाचारी कांग्रेस और मुस्लिम लीग के समझौता के पूर्ण पक्षधर थे. गाँधी जी के स्वीकृति से 10 जुलाई, 1944 को कांग्रेस और मुस्लिम लीग के समझौते की एक योजना प्रस्तुत की जो राजगोपालाचारी फार्मूला लीग के नाम से प्रसिद्ध है. जिन्ना ने इस फार्मूला को अस्वीकार किया और अपने द्विराष्ट्र के सिद्धांत पर अटल रहे.
  18. गाँधी जी ने जिन्ना ने 16 अगस्त, 1946 को ‘प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस’ के रूप में मनाया.
  19. माउंटबेटन ने गाँधी जी को ‘वन मैन बाउंड्री फ़ोर्स’ की उपाधि प्रदान की.
  20. सितंबर, 1916 में एनी बेसेंट ने मद्रास में ‘अखिल भारतीय होमरूल लीग’ की स्थापना की. लीग के बढ़ते प्रभाव एवं चारों ओर से दबाव महसूस कर भारत में ‘उत्तरदायी शासन’ की बात कही. परिणामस्वरूप अगस्त, 1917 में ऐनी बेसेंट ने होमरूल लीग को समाप्त करने की घोषणा की.
  21. ऐनी बेसेंट ने होमरूल आन्दोलन का प्रचार अपने दैनिक पत्र ‘न्यू इण्डिया’ एवं साप्ताहिक पत्र ‘कामनवील’ के माध्यम से किया. 
Previous Post
Next Post
Related Posts