बिहार के प्रमुख लोक नृत्य और लोक नाटक
![]() |
| बिहार के लोक नृत्य और लोक नाटक |
प्रत्येक लोक नृत्य का प्रत्येक समाज में
अपना एक अलग-अलग विशेष महत्त्व होता है. इसमें उस राज्य, उस देश और उस समाज की एक
अलग पहचाना होती है. लोक नृत्य की बिहार राज्य में एक अपना अलग महत्व है. सभी तरह
के पर्व त्योहारों पर, संस्कारों पर, मनोरंजन केसुअवसर पर किया जाता है. इस लोक
नृत्य में अपना अपना के अगल संदेश होता है जो आपसी प्रेम सौहार्द्र का और भाई चारे
का प्रतीक होता है. इस लोक नृत्य की तरह बिहार में लोक नाटक भी मुख्य रूप से
प्रचलित है. इनसे आपकी परीक्षाओं में सवाल पूछे जाते भी हैं. उन सारी बातों के
विषय में एक नई जानकारी मिलेगी जो नीछे उल्लेखनीय है.
करिया झूमर लोक नृत्य
इस लोक नृत्य को महिलाओं द्वारा
किया जाने वाला प्रधान लोक नृत्य है. इस लोक नृत्य में महिलाएं हाथों में हाथ
डालकर घूम-घूमकर नाचती गाती हैं.
छऊ लोक नृत्य
यह नृत्य मुख्य रूप से पुरुषों
द्वारा किया जाता है. छाऊ नृत्य युद्ध से संबंधित होता है. यह इसके दो भेद
हैं :
a. वीर रस – यह लोक नृत्य नर्तकों के द्वारा अपनी भाव-भंगिमाओं अपनी ओजस्वी आवाज एवं पैरों के लयबद्ध धीमी और तीव्र थिरकन से वीर रस के भाव को प्रस्तुत किया जाता है.
b.कालीभंग – यह लोक नृत्य श्रृंगार रस से परिपूर्ण रहता है. यह लोक नृत्य बिहार और झारखण्ड राज्यों में लोकप्रिय हैं.
कठघोड़वा लोक नृत्य
इस नृत्य को नर्तक के द्वारा अपनी
पीठ पर से बांस की खपचियों से बना घोड़े के आकार के आकार का ढांचा बनाकर किया जाता
है. यह लोक नृत्य झारखण्ड और बिहार राज्य में समान रूप से लोकप्रिय है.
धोबिया लोक नृत्य
इस लोक नृत्य में धोबिया समाज के
लोग का प्रमुख नृत्य माना जाता है.
पवड़िया लोक नृत्य
यह लोक नृत्य पुरुषों के द्वारा
महिलाओं के पोषाक धारण कर पवड़िया लोक नृत्य किया जात हैं. बच्चों के जन्मोत्सव पर
किया जाता है.
जोगिया लोक नृत्य
यह लोक नृत्य होली के विशेष अवसर
पर किया जाता है महिलाओं और पुरुषों के द्वारा किया जाता है.
झिझिया लोक नृत्य
यह लोक नृत्य दुर्गा पूजा के अवसर
पर किया जाता है. इसे महिलाओं द्वारा किया जाता है.
खीलडीन लोक नृत्य
यह लोक नृत्य विशेष अवसरों पर
अतिथियों के मनोरंजन के लिए किया जाता है.
लंडा लोक नृत्य
यह नृत्य विशेष रूप से आरा के
भोजपुर क्षेत्र में प्रसिद्ध और प्रचलित है. इसमें लड़का लड़की के रूप में धारण करता
है और पूरी तरह सिंगार करके नृत्य करता है.
झरनी लोक नृत्य
झरनी नृत्य मोहर्रम के अवसर पर
मुस्लिम नर्तको द्वारा शोक गीत गाते हुए किया जाता है. यह एक तरह का लोक नृत्य है.
विद्यापति लोक नृत्य
यह लोक नृत्य पूर्णिया जिले के
क्षेत्र में अधिक प्रसिद्ध है. इस लोक नृत्य में कवि विद्यापति के पदों को गाते
हुए सामूहिक रूप से नृत्य किया जाता है.
कजारी लोक नृत्य
इस लोक नृत्य में लोग वर्षा के
माध्यम से कैसे खुश हुए इसका वर्णन किया जाता. यह लोक नृत्य विशेष रूप से मानसून
के समय में किया जाता है.
करिया झूमर लोक नृत्य
इस लोक नृत्य को महिलाओं द्वारा
किया जाता है. इसमें महिलाएं एक दूसरे के हाथों में हाथ डालकर सभी ओर (चारों
दिशाओं में) गोल-गोल घुमती है.
खोलडीन लोक नृत्य
यह लोक नृत्य विवाह या अन्य विशेष
मांगलिक कार्यों पर आमंत्रित अतिथियों के सामने केवल उनके मनोरंजन के लिए
व्यावसायिक महिलाओं के द्वरा किया जाने वाला लोक नृत्य है.
जोगीड़ा लोक नृत्य
यह लोक नृत्य मौज-मस्ती की
प्रमुखता वाले इस नृत्य में होली त्यौहार पर ग्रामीण लोगों के द्वारा एक-दूसरे को
रंग गुलाल को लगाते हुए इस लोक नृत्य को करते हैं.
अन्य लोक लोक नृत्य
गंगिया, मांझी, धो-धो रानी,
गोंडिन, लौढियारी, बोलबै, घांटों, इनी-बिन्नी, देवहर, बगुलो, कजरी लगुई नृत्य.
बिहार के प्रमुख लोक नाटक
विदेशिया लोक नाटक
यह नृत्य की शुरुआत बीसवीं सदी से
हुई थी. यह नृत्य नाटक के रूप में भोजपुरी क्षेत्र में अधिक प्रसिद्ध है. विदेशियाँ
नृत्य में महिला पात्र की भूमिका भी पुरुष कलाकार करते हैं. इसकी शुरुआत मंगलाचरण
से होती है.
डोमकच लोक नाटक
इस नाटक में पूरी तरह से महिलाओ
द्वारा किया जाने वला नाटक है. इसे हास परिहास से परिपूर्ण पारिवारिक उत्सव पर
किया जाता है.
जट जटिन लोक नाटक
इस लोक नाटक सावन से कार्तिक मास
की पूर्णिमा तक किया जाता है. यह नट नाटक केवल अविवाहितों के द्वारा किया जाने
वाला नाटक है. यह नाटक जट जटिन के दांपत्य जीवन से संबंधित है. अमूमन जट-जटिन कठिन
परिस्थियों में रह रहे प्रेमियों की कहानी को बयान करता है.
सामा चकेवा लोक नाटक
इस लोक नाटक को कार्तिक शुक्ल
सप्तमी से पूर्णमासी तक किया जाता है. यह लोक नाटक में जो भी पात्र होते हैं उनको
मिट्टी से बनाया जाता है. इस लोक नाटक के विषय वस्तु को क्रमशः रूप से प्रस्तुत
किया जाता है. इन नाटक को केवल लड़कियों द्वारा खेला जाता है.
कीर्तनिया लोक नाटक
इस लोक नाटक में भगवान श्री कृष्ण
की लीलाओं का वर्णन कीर्तन भक्ति गीतों के माध्यम से की जाती है. इस लोक नाटक के
माध्यम से श्री कृष्ण के जीवन से जुड़ी हुई
घटनाओं को बहुत ही भावपूर्ण अभिनय द्वारा प्रस्तुत किया जाता है.
