भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1. 1876 में बंगाल के युवा राष्ट्रवादियों ने सुरेन्द्रनाथ बनर्जी और आनन्द मोहन बोस के नेतृत्व में इन्डियन एसोशिएशन का गठन किया. दिसंबर, 1883 में इंडियन एसोशिएशन ने ‘अखिल भारतीय राष्ट्रीय सम्मेलन’ का आयोजन किया. दूसरा सम्मेलन दिसम्बर, 1885 ई. में कलकत्ता में हुआ जिसकी अध्यक्षता सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ने की. यही कारण था कि अखिल भारतीय राष्ट्रीय सम्मेलन से जुड़े सुरेन्द्रनाथ बनर्जी 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के स्थापना सत्र में शामिल नहीं हुए थे. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 ई. में ए. ओ. ह्यूम द्वरा की गई थी जो एक अवकाश प्राप्त अंग्रेज अधिकारी थे. इसका पहला अधिवेशन 28 दिसंबर, 1885 को मुंबई स्थित गोकुलदास तेजपाल संस्कृत विद्दालय में आयोजित किया गया. इसमें कुल 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले अधिवेशन की अध्यक्षता व्योमेश चन्द्र बनर्जी ने की थी तथा इसके प्रथम महासचिव स्वयं ए.ओ.ह्यूम थे.
1.
कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन 1928
में ब्रिटिश सरकार को यह अल्टीमेट दिया गया कि वह वर्ष में नेहरू रिपोर्ट स्वीकार
कर ले गया कांग्रेस द्वारा प्रारभ किए जाने वाले जनांदोलन का सामना करे. निर्धारित
समय सीमा में सरकार द्वारा कोई निश्चित उत्तर न मिलने की स्थिति में दिसंबर, 1929
में पं. जवाहरलाल नेहरु की अध्यक्षता में कांग्रेस का ऐतिहासिक लाहौर अधिवेशन हुआ,
जिसमें संबंधित प्रस्ताव पारित होने के बाद पं. जवाहरलाल नेहरू ने ‘पूर्ण स्वराज’
का लक्ष्य घोषित किया. जैसे ही 31 दिसम्बर 1929 को मध्यरात्रि का घंटा बजा,
कांग्रेस अध्यक्ष पं. जवाहरलाल नेहरु ने लाहौर में रावी के तट पर भारतीय
स्वतंत्रता का झंड फहाराय. कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा 2 जनवरी, 1930 की अपनी बैठक
में यह निर्णय लिया गया कि 26 जनवरी, 1930 का दिन ‘पूर्ण स्वराज दिवस’ के रूप में
मनाया जाएगा तथा 26 जनवरी को प्रत्येक वर्ष ‘पूर्ण स्वाधीनता दिवस’ के रूप में.
भारत में ट्रेड यूनियन (अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस) की स्थापना एन. एम.
जोशी द्वारा 31 अक्टूबर, 1920 ई. को बंबई में की गई. इसकी स्थापना का कारण 1919 ई.
में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की स्थापना था. इसलिए भारतीय श्रमिक संगठनों ने आपस
में संगठित होने का फैसला किया. इसके प्रथम अध्यक्ष लाला लाजपत राय थे और
उपाध्यक्ष जोसेफ बैपटीस्ता एवं महामंत्री दीवान चमनलाल बजाज थे इस संगठन का प्रथम
विभाजन 1929 ई. में नागपुर अधिवेशन में हुआ. इस समय जवाहरलाल इसके अध्यक्ष थे.
2.
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की
स्थापना कांग्रेस की स्थापना 1885 के समय भारत का वासराय लार्ड डफरिन (कार्यकाल
1884- 1888) था. उसने कांग्रेस का यह कहकर मजाक उड़ाया था कि यह ‘सूक्ष्मदर्शी
अल्पसंख्यकों की संस्था’ है.
3.
26 जुलाई, 1876 को सुरेन्द्रनाथ
बनर्जी ने आनन्द मोहन बोस के सहयोग से इंडियन एसोशिएशन या भारत संघ की स्थापना
कलकत्ता में की. यह तत्कालीन राजनीतिक संस्थाओं में सबसे प्रमुख एवं महत्वपूर्ण
थी, जिसे कांग्रेस से पूर्व अखिल भारतीय स्तर की संस्था का सम्मान प्राप्त था. जिसे
कांग्रेस से पूर्व अखिल भारतीय स्तर की संस्था का सम्मान प्राप्त था. इस संस्था ने
सिवील सेवा परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग तथा इल्बर्ट बिल विवाद जैसे मामलों
को लेकर आन्दोलन चलाया. इंडियन एसोसिएशन (भारत संघ) में जमींदारों के स्थान पर
मध्यम वर्ग को प्रधानता दी गई थी.
4.
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1885
ई. में महासचिव (सचिव) ए. ओ. ह्यूम थे.
5.
इन्होंने ही कांग्रेस का गठन किया.
डब्ल्यू सी. बनर्जी 1885 ई. में कांग्रेस के पथम अधिवेशन के अध्यक्ष थे.
6.
अप्रैल, 1963 में लखनऊ में ‘अखिल
भारतीय किसान कांग्रेस’ की स्थापना हुई जिसका नाम बदलकर ‘अखिल भारतीय किसान सभा’
कर दिया गया. बिहार प्रांतीय किसान सभा के संस्थापक स्वामी सहजानंद सरस्वती इसके
अध्यक्ष और आंध्र में किसान आन्दोलन के अगुआ तथा कृषि क्षेत्र की समस्याओं के
विद्वान् एन. जी. रंगा इसके महासचिव चुने
गए. फैजपुर में कांग्रेस सत्र के साथ अखिल भारतीय किसान कांग्रेस का भी दूसरा सत्र
चला जिसकी अध्यक्षता एन. जी. रंगा ने की.
7.
दिसम्बर, 1929 ई. में कांग्रेस का
अधिवेशन लाहौर में हुआ. इस अधिवेशन के अध्यक्ष गाँधी जी चुने गए थे, लेकिन
उन्होंने अपनी जगह जवाहर लाल नेहरू को अध्यक्ष बनाया. जवाहरलाल नेहरू ने कहा कि,
‘आज हमारा बस एक ही लक्ष्य है स्वाधीनता का लक्ष्य. हमारे लिए स्वाधीनता के मायने
है ब्रिटिश साम्राज्यवाद से पूर्ण स्वतंत्रता.’ अत: स्पष्ट है कि लाहौर अधिवेशन
में पूर्ण स्वराज के संकल्प की घोषणा की गई थी.
8.
31 दिसम्बर, 1929 को कांग्रेस के
अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू ने लाहौर में रावी के तट पर भारतीय स्वंतत्रता का झन्डा
फहराया.
9.
इस अधिवेशन में सविनय अवज्ञा
आन्दोलन शुरू करने की महात्मा गाँधी द्वारा घोषणा की गई.
10.
कांग्रेस की नई कार्य समिति की
बैठक 2 जनवरी, 1930 को हुई.
11.
उसमें 26 जनवरी, 1930 को पूर्ण
स्वाधीनता दिवस संपूर्ण भारत में मनाने का
निश्चय किया गया.
12.
भारतीय राष्ट्रीय
कांग्रेस के लखनौऊ अधिवेशन, 1916 में बाल गंगाधर तिलक ने कहा था, ‘स्वराज मेरा
जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं उसे लेकर रहूँगा.’ इस अधिवेशन में उग्रवादियों की
पुन: कांग्रेस में वापसी हुई तथा तिलक एवं एनी बेसेंट के प्रयासों से कांग्रेस तथा
मुस्लिम लींग के बीच समझौता हुआ. यह समझौता ‘लखनऊ समझौता’ या ‘कांग्रेस लीग
समझौता’ के नाम से भी प्रसिद्ध है.
13.
त्रिपुरा, जबलपुर (मध्यप्रदेश) में
स्थित है. त्रिपुरी में 1939 में कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए सुभाष
चन्द्र बोस एवं गाँधी जी द्वारा समर्थित उम्मीदवार पट्टाभि सीतारमैया के बीच मतदान
हुआ. सुभाष चन्द्र बोस ने सीतारमैया को 1377 मतों के मुकाबले 1580 मतों से पराजित
कर दिया.
14.
सुभाष चन्द्र बोस का कार्यकारिणी
के गठन के प्रश्न पर गाँधी जी से विवाद हो जाने के कारण इन्होंने अध्यक्ष पद से
त्यागपत्र दे दिया.
15.
बोस के त्यागपत्र देने के पश्चात
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को अध्यक्ष बनाया गया.
16.
कांग्रेस का 38वां अधिवेशन 28-31
दिसंबर, 1923 ई. में काकीनाडा (आंध्र प्रदेश) में हुआ था. इसके अध्यक्ष मौलाना
मुहम्मद अली थे इन्होंने वंदेमातरम् की रचना बंकिम चन्द्र चटर्जी द्वारा की गई थी.
17.
कांगेस क मंच से वंदेमातरम् का
प्रथम गान 1896 ई. में कलकत्ता में किय गया.
18.
‘वंदेमातरम्’ गीत के रचयिता बंकिम
चन्द्र चटर्जी है. यह गीत आनन्द मठ उपन्यास से लिया गया है.
19.
आनन्द मठ बंगला भाषा का एक उपन्यास
है जिसकी रचना बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ने 1882 ई. में की थी.
20.
इस कृति क भारतीय स्वतंत्रता संग्राम
और स्वतंत्रता के क्रांतिकारियों पर बहुत गहरा पभाव पड़ा.
21.
इस उपन्यास में उत्तर बंगाल में
1773 ई. के संन्यासी विद्रोह का वर्णन किया गया है.
22.
1896 ई. के कलकत्ता अधिवेशन में
‘वंदेमातरम्’ का गान पहली बार किया गया.
23.
बाल गंगाधर तिलक कांग्रेस के
अध्यक्ष कभी नहीं बन सकें.
24.
महात्मा गाँधी ने बेलगावं के 39वां
अधिवेशन 1924 में कांग्रेस की अध्यक्षता 1919 में की थी जबकि गोपाल कृष्ण गोखले ने
1905 ई. में वाराणसी अधिवेशन (21वें) की अध्यक्षता की थी.
25.
कांग्रेस की प्रथम अधिवेशन की
अध्यक्षता डब्लू. सी. बनर्जी ने की थी.
कलकत्ता अधिवेशन 1906 की अध्यक्षता दादाभाई नौरोजी ने
की थी.
26.
1916 ई. में कांग्रेस के लखनऊ
अधिवेशन की अध्यक्षता अंबिका चरण मजूमदार ने की थी.
27.
ए. ओ. ह्यूम के जीवनी मेंवेडरबर्न ने
लिखा ‘ भारत में असंतोष की बढती हुई शक्तियों से बचने के लिए यिक अभयद्वीप की
आवश्यकता है और कांग्रेसी आन्दोलन से बढकर अभयद्वीप को दूसरी चीज नहीं हो सकती. लाला
लाजपत राय ने अपनी पुस्तक ‘यंग इण्डिया’ में लिखा है कि ‘भारतीय राष्ट्रीय
कांग्रेस की स्थापना का मुख्य कारण यह था कि इसमें संस्थापकों की उत्कंठा ब्रिटिश
साम्राज्य को छिन्न-भिन्न होने से बचाने को थी.
28.
रजनीपाम दत्त ने अपनी पुस्तक
‘इंडिया टुडे’ में लिखा ‘शिशु कांग्रेस ‘ की स्थापना ब्रिटिश सरकार की एक पूर्व-निश्चित
गुप्त योजना के अनुसार की गई.
29.
ऐनी बेसेंट ने लिखा ‘राष्ट्रीय
कांग्रेस का जन्म मातृभूमि की रक्षा हेतु 17 प्रमुख भारतियों तथा ह्यूम के द्वारा
हुआ.
30.
1936 ई. में फैजपुर (महाराष्ट्र)
में पहली बार कांग्रेस का अधिवेशन एक गाँव में हुआ. इसकी अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू
ने की थी. इस अधिवेशन में एक ’13 सूत्रीय अस्थाई कृषि कार्यक्रम’ घोषित किया गया.
31.
कराची अधिवेशन 1931 ई. में
राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम से संबंद्ध प्रस्ताव पारित किया गया.
32.
इसी अधिवेशन में मौलिक अधिकार का
प्रस्ताव पारित किया गया.
33.
कराची अधिवेशन में गाँधी जी ने कहा था.
‘गाँधी मर सकते हैं, परन्तु गांधीवादी हमेशा जिन्दा रहेगा.’
34.
1931 ई. के कराची अधिवेशन की
अध्यक्षता बल्लभ भाई पटेल ने की थी.
35.
ऐलन आक्तोवियन ह्यूम (ए. ओ. ह्यूम)
भारतीय सिविल सेवा के सेवानिवृत्ति ब्रीटिश अधिकारी थे. ये शिमला में बस गए
थे.
36.
1884 में इन्होंने भारतीय राष्ट्रीय
संघ की स्थापना की, जो कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अग्रदूत था. कलकत्ता, बंबई
तथा मद्रास का दौरा करने के उपरांत इन्होंने यह घोषणा की कि दिसंबर 1885 में
भारतीय राष्ट्रीय संघ का एक सम्मेलन पुणे में आयोजित किया जाएगा जिसमें तीनों
महाप्रान्तों के सभी भागों के शिक्षित प्रतिनिधि शामिल होंगे. लेकिन पुणे में हैजा
फ़ैल जाने के कारण सम्मेलन का स्थल बदलकर तेजपाल संस्कृत विद्दालय, बंबई कर दिया
गया. भारतीय राष्ट्रीय संघ का पहला अधिवेशन 28 दिसम्बर, 1885 को हुआ, इसी सम्मेलन
में दादाभाई नौरोजी के सुझाव पर इस संगठन का नाम बदलकर ‘भारतीय राष्ट्रीय
कांग्रेस’ कर दिया गया.
37.
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1889
के बंबई अधिवेशन में कुल दस भारतीय महिलाओं ने भाग लिया. इस अधिवेशन की अध्यक्षता
विलियम वेडरबर्न ने की थी. इस अधिवेशन में 12 वर्षीय मताधिकार का प्रस्ताव पारित
हुआ और कांग्रेस की एक ‘ब्रिटिश समिति’ का गठन लन्दन में हुआ.
38.
कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन में कुल
72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था.
39.
कांग्रेस के दूसरे अधिवेशन में 434
प्रतिनिधि आए थे.
40.
कांग्रेस के तीसरे अधिवेशन में 607
प्रतिनिधियों ने भाग लिया था.
41.
कांग्रेस का दूसरा अधिवेशन 1886 ई. में
कलकत्ता में हुआ. इसकी अध्यक्षता दादाभाई नौरोजी ने की. इसी अधिवेशन में इंडियन
नेशनल कांफेरेन्स का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में विलय हुआ था. इसके अतिरिक्त
दादा भाई नौरोजी ने 1893 ई. में लाहौर अधिवेशन तथा 1906 ई. में कलकत्ता अधिवेशन की
अध्यक्षता की थी.