मराठा राज्य/संघ
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| मराठा साम्राज्य GK |
1. 14 जून, 1674 को शिवाजी ने काशी के प्रसिद्ध विद्वान गंगाभट्ट से अपना राज्याभिषेक रायगढ़ में करवाया तथा छत्रपति की उपाधि धारण की.
2. शिवाजी का अंतिम महत्वपूर्ण अभियान 1677 ई. में कर्नाटक अभियान था.
3. 1627 ई. पूना के निकट शिवनेर के दुर्ग में शिवाजी की जन्म हुआ. सर्वप्रथम शिवाजी ने 1643 ई. में बीजापुर के सिंहगढ़ के किले पर अधिकार किया.
4. शिवाजी का जन्म 1627 ई. में शिवनेर के दुर्ग में हुआ था. वहाँ के देवी के नाम पर माँ जीजाबाई ने इनका नाम शिवाजी रखाशिवनेर का दुर्ग पूना के उत्तर में गुन्नार नगर के समीप था.
5. शिवाजी की माँ जीजाबाई देवगिरी के यादवों के वंशज लखुजी जाधवराव की पुत्री थी.
6. शिवाजी के संरक्षक एवं शिक्षक दादा कोड़देव थे.
7. शिवाजी का राज्याभिषेक 1674 ई. में रायगढ़ में हुआ. रायगढ़ को इन्होंने अपनी राजधानी बनाया. यही पर 12 अप्रैल, 1680 को शिवाजी की मृत्यु भी हुई.
8. शिवाजी के छोटे पुत्र शम्भा जी के सौतेले भाई राजाराम मुगलों के आक्रमण के भय से ‘जिंजी’ में शरण ली थी.
9. 1698 ई. में राजाराम जिंजी से पलायन कर ‘सतारा’ के प्राकृतिक दुर्गों में अपनी राजधानी बनाई.
10. शिवाजी और कछवाहा राजा जयसिंह के बीच 22 जून, 1665 को पुरन्दर की संधि सपन्न हुई. इस सन्धि की शर्तें निम्न थीं :
क. शिवाजी अपने 35 किलों में से 23 किले मुगलों को दे देंगे.ख. मुगलों ने शिवाजी के पुत्र शम्भा जी को पंचहजारी एवं उचित जागीर देना स्वीकार किया.
ग. शिवाजी ने बीजापुर के विरुद्ध मुगलों को सैनिक सहायता देने का वायदा किया.
11. 1660 ई. में औरंगजेब ने शाइस्ता खां को शिवाजी को समाप्त करने के लिए दक्षिण का सूबेदार नियुक्त किया.
12. 1663 ई. में शिवाजी रात्रि में चुपके से शाइस्ता खां के महल पर आक्रमण कर दिया.
13. 1659 ई. में बीजापुर राज्य ने अपने प्रख्यात सरदार अफजल खां को शिवाजी को कैद करने या मार डालने के लिए भेजा.
14. अफजल खां ने मुलाक़ात के बहाने उनकी हत्या की योजना बनाई परन्तु शिवाजी ने इसकी योजना को निष्फल कर उसकी हत्या कर दी.
15. 1674 ई. में शिवाजी ने अपना राज्याभिषेक कराया तथा ‘छत्रपति’ की उपाधि धारण की एवं ‘रायगढ़’ को अपनी राजधानी बनाया. उस युग के महान विद्वान बनारस के पंडित विश्वेश्वर उर्फ़ गंगाभट्ट ने उन्हें क्षत्रिय घोषित करते हुए उनका राज्याभिषेक कराया.
16. प्रशासन में शिवाजी की सहायता और परामर्श के लिए 8 मंत्रियों की के परिषद थी. इसे ‘अष्टप्रधान’ परिषद कहा जाता था. अष्टप्रधान परिषद का प्रत्येक मंत्री अपने विभाग का प्रमुख था जिसकी नियुक्ति शिवाजी द्वारा की जाती थी. सेनापति के अतिरिक्त प्राय: सभी मंत्री ब्राह्मण होते थे और न्यायधीशों तथा पंडितराव को छोड़कर सभी को अवसर पड़ने पर सेनाओं को नेतृत्व करना पड़ता था.
17. 1800 ई. में नाना फडनवीस की मृत्यु हो गई. इसके बाद में यह कहा गया कि मराठा सरकार की बुद्धि एवं संयम भी चले गए थे.
18. 1784 ई. में इसके नेतृत्व में मराठों ने टीपू को परास्त कर कुछ प्रदेश प्राप्त किए.
19. 1795 ई. में मराठा सेनाओं ने निजाम को खर्दा के युद्ध में परास्त किया.
20. 1796 ई. में पेशवा माधव नारायण ने नाना के कठोर नियंत्रण से तंग आकर आत्महत्या कर ली.
21. शिवाजी के समय भू-राजस्व की दर 2/5 भाग या 40 प्रतिशत थी.
22. शिवाजी के शासनकाल में प्रारंभ में उपज के आधार पर उपज का 1/3 भाग भूमि कर लिया जाता था. बाद में शिवाजी ने अन्य स्थानीय करों व चुन्गियों को समाप्त कर दिया तब भूमि कर बढ़ाकर 2/5 कर दिया.
23. शिवाजी के लगान व्यवस्था रैयतवाड़ी थी.
24. चौथ और सरदेशमुख मराठा साम्राज्य के आय का प्रमुख स्रोत था.
25. शिवाजी ने भूमि की पैमाइस काठी से कराई, 20 काठी लंबाई और 20 काठी चौड़ाई वाली भूमि को एक वर्ग या बीघा कहा जाता था.
26. 120 बीघे को एक चावर कहा जाता था.
27. शिवाजी के आध्यात्मिक गुरु समर्थ रामदास थे.
28. जिहोने अध्यात्मिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक शिक्षा भी प्रदान की. यह प्राय: शिवाजी से कहा करते थे कि ‘समस्त मराठों को एकीकृत करो तथा महाराष्ट्र के धर्म का प्रचार करो’.
29. महाराष्ट्र में एक स्वतंत्र हिन्दू राज्य की स्थापना करना शिवाजी का मुख्य लक्ष्य था.
30. शिवाजी ने हिन्दू पद पादशाही अंगीकार किया और ब्राह्मणों की रक्षा का व्रत लिया.
31. इस उद्देश्य से शिवाजी ने हिन्दू धर्मोद्धारक की उपाधिधारण की..
32. शिवाजी के अष्टप्रधान में सुमंत या दयाबीर राज्य का विदेश मंत्री था.
33. सुमंत अथवा दबीर का मुख्य कार्य निम्न हुआ करते थे :
क. राजा को संधि अथवा युद्ध के बारे में सलाह देना.ख. विदेशों से समाचार प्राप्त करना.ग. विदेशी राजदूतों की देखभाल करना.घ. अपने राजदूतों को विदेशों में भेजना.
34. शिवाजी का जन्म 1627 ई. में हुआ था. 1640-42 ई. तक शिवाजी कर्नाटक में अपने पिता के साथ रहे. शिवाजी ने प्रारंभिक सैन्य अभियान बीजापुर के आदिलशाह राज्य के विरुद्ध शुरू हुआ. 1643 ई. में शिवाजी ने सर्वप्रथम सिंहगढ़ का किला जीता. इसके पश्चात्य शिवाजी ने लगातार अपना विजय अभियान जारी रखा. अत: उपलब्ध स्रोतों के आधार पर दिए गए विकल्प के अनुसार 1644 ई. से शिवाजी का उदय अनुरेखित किया जा सकता है.
35. शिवाजी ने 1646 ई. में तोरड़ दुर्ग पर अधिकतर कर लिया.
36. शिवाजी ने 1647 ई. में कुंडाना दुर्ग पर अधिकार किया.
37. शिवाजी ने 1654 ई. में पुरंदर के महत्वपूर्ण दुर्ग पर अधिकार कर लिया.
38. शिवाजी ने राज्य के प्रशासन के लिए केन्द्रीय स्तर पर ‘अष्टप्रधान’ की व्यवस्था की थी, जिसके अंतर्गत आठ मंत्रियों को नियुक्त किया गया था. इसमें पेशवा, अमात्य, मंत्री, सचिव, सेनापति, पंडितराव, एवं न्यायधीश शामिल थे. ये शिवाजी के राज्य प्रशासन में आधुनिक काल के सचिवों की भाँति कार्य करते थे. इनका कार्य राजा को परामर्श देना मात्र था. इसे किसी भी अर्थ में मंत्रिमंडल नहीं कहा जा सकता. प्रत्येक मंत्री राजा के प्रति उत्तरदायी था. ये निम्न प्रकार थे :
क. पेशवा – राजा का प्रधान मंत्री.
ख. अमात्य – वित्त एवं राजस्व मंत्री
ग. वाकिया नवीस या मंत्री – राजा के दैनिक कार्यों तथा दरबार की प्रतिदिन की कार्यवाहियों को विवरण रखता था.
घ. सचिव – राजकीय पत्र व्यवहार का कार्य देखना.
ङ. सुमंत या दयाबीर – विदेश मंत्री.
च. सेनापति या सर-ए-नौबत – सेना की भर्ती, संगठन, रसद आदि का प्रबंध करना.
छ. पंडित राव - विद्वानों और धार्मिक कार्यों के लिए अनुदानों का दायित्व निभाना.
ज. न्यायाधीश – मुख्य न्यायाधीश.
39. 1657 ई. में शिवाजी का मुकाबला पहली बार मुगलों से हुआ. दक्षिण के सूबेदार और अरंगजेब की सेना तथा शिवाजी के बीच संघर्ष हुआ, लेकिन मराठों को पीछे हटना पड़ा.
40. शिवाजी एवं अफजल खां का संघर्ष 1959 ई. में हुआ था.
41. शिवाजी एवं शाइस्ता खां में संघर्ष 1663 ई. को हुआ था.
42. शिवाजी और राजा जयसिंह के बीच पुरंदर की सन्धि 1665 ई. में हुई थी.
43. मराठों की पराजय का मुख्य कारण सदाशिवराव की कुटनीतिक असफलता और अब्दाली की तुलना में उसका दुर्बल सेनापति था.
44. पानीपत के तृतीय युद्ध के समय पेशवा बालाजी बाजीराव थे.
45. यह युद्ध 14 जनवरी 1761 को अफगानिस्तान के शासक अहमद शाह अब्दाली तथा मराठों के बीच में हुआ. इस युद्ध में मराठे बुरी तरह पराजित हुए.
क. इस युद्ध में अवध के नवाब सुजाउद्दौला तथा रूहेला हाफिज रहमत खां तथा सादुल्ला खां का समर्थन अब्दाली को प्राप्त हुआ.
ख. दूसरी तरफ मराठों को राजपूत, सिक्ख एवं जाटों का समर्थन नहीं प्राप्त हुआ.
ग. इस युद में मराठों की तरफ से तोपखाने की कमान इब्राहिम खां गार्दी ने संभाली थी.
46. राजाराम की मृत्यु के पश्चात्य इसकी विधवा ताराबाई ने अपने चार वर्षीय पुत्र शिवाजी द्वितीय को गद्दी पर बैठाकर स्वयं उसका संरक्षक बन गई.
47. तारा बाई ने 1700-1707 ई. तक शासन किया.
48. 1700- 1707 ई. के समय को मराठों के स्वतंत्रता संग्राम के रूप में जाना जाता है.
49. ताराबाई के समय में मराठे महाराष्ट्र को स्वतंत्र कराने में ही नहीं अपितु मुगल प्रदेशों पर आक्रमण करने और औरंगजेब की छावनी तक लुटने में सफल हो रहे थे.
50. सिंधिया की मध्यस्थता से 17 मई, 1782 को मराठों तथा अंग्रेजों के बीच सालबई की सन्धि हुई थी. इस सन्धि का सबसे बड़ा महत्त्व यह रहा कि मराठों और अंग्रेजों के बीच 20 वर्ष तक शान्ति बनी रही.

