ईस्ट इण्डिया कंपनी और बंगाल के नवाब
ईस्ट इण्डिया कंपनी और बंगाल के नवाब
1. कलकत्ता की स्थापना से पूर्व हुगली, बंगाल में अंग्रेजों की विशालतम बस्ती थी.
2. बृजमैन के अधीन 1651 ई. में एक कोठी हुगली में खोली गई और शोरे, रेशम और चीनी का व्यापार आरंभ किया गया. ये बंगाल की प्रमुख निर्यात जिन्स थीं.
3. भारत में कंपनी की कई फैक्टरी एक किलाबन्द क्षेत्र जैसी होती थी जिसके अंदर गोदाम, दफ्तर और कंपनी के कर्मचारियों के लिए घर होते थे. ध्यातव्य है कि इन फैक्टरियों में उत्पादन का कोई काम नहीं होता था.
4. बंगाल के सूबेदार शाहाशुजा ने 1651 ई. में एक फरमान निकाला, जिसमें 3000 रु. वार्षिक कर के बदले कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा में मुक्त व्यापार की अनुमति दी गई.
5. 1656 ई. में दूसरा ‘निशान’ मंजूर किया गया जिसके तहत बिना किसी बाधक के व्यापार की अनुमति की पुष्टि की गई.
6. 12 अगस्त, 1765 के इलाहाबाद की प्रथम संधि पर शाहआलम द्वितीय, बंगाल के नवाब नज्मुद्दौला एवं क्लाइव ने हस्ताक्षर किए. इस सन्धि के अनुसार मुगल सम्राट शाहआलम द्वितीय ने 12 अगस्त के फरमान के जरिए बंगाल, बिहार एवं उड़ीसा की दीवानी कंपनी को दे दिया. इस प्रकार जब अंग्रेजों को बंगाल की दीवानी प्राप्त हुई उस समय (12 अगस्त, 1765) बंगाल का नवाब नज्मद्दौला था.
7. गुलाम हुसैन ने अपनी पुस्तक ‘सियारुल मुत्खैरिन’ में लिखा है कि ‘इलाहाबाद की सन्धि की शर्तों को तय करने में उतना भी समय नहीं लगा जितना की एक गधे को खरीदने में लगता है.
8. इलाहाबद की दूसरी संधि (16 अगस्त, 1765) अवध के नवाब शुजाद्दौला और क्लाइव के बीच हुई.
9. इलाहाबाद की दूसरी संधि के अनुसार अवध का राज्य कड़ा और इलाहाबाद को छोड़कर नवाब को वापस मिल गया.
10. कासिम बाजार की फैक्टरी के प्रमुख जॉब चारनाक ने अंग्रेज व्यापार केन्द्र के लिए हुगली के स्थान पर सुतानाती (कलकत्ता का स्थल) को चना और इस तरह 1690 ई. में जॉब चारनाक ने अग्रेज बस्ती के रूप में कलकत्ता की स्थापना की.
11. बंगाल के सूबेदार अजीम-उस-सान ने 1698 ई. में अग्रेजों को सुतानाती, कालिकाता एवं गोविंदपुर नामक तीन गांवों की जमींदारी प्रदान की जिसके बदले में इन गाँव के मालिकों को 1200रु. देना पड़ा. इंग्लैण्ड के सम्राट के सम्मान में सुतानाती, कोलकाता और गोविन्दपुर की किलाबन्द व्यावसायिक प्रतिष्ठान का नाम फोर्ट विलियम रखा गया.
12. 1700 ई. में फोर्ट विलियम को पहला प्रेसिडेन्सी नगर घोषित किया गया.
13. नवाब के विरुद्ध षडयंत्र का अमीचंद द्वारा भंडाफोड़ की बात कहने पर क्लाइव ने अमीचंद से समझौता कर लिया. समझौते के दो प्रारूप तैयार किए गए- सफेद कागज (असली प्रारूप) और लाल कागज (नकली प्रारूप) अमीचंद के मांगों का उल्लेख केवल लाल कागज पर था. वाट्सन ने केवल सफेद कागज पर हस्ताक्षर किया था. लाल प्रारूप पर क्लाइव ने वाट्सन के नकली हस्ताक्षर बना दिए तथा उसे अमीचंद को दे दिया.
14. नवाब के विरुद्ध षड्यंत्र में नवाब का सेनापति मीर जाफर, यार लतीफ़, दीवान राय दुर्लभ और बंगाल के सबसे बड़े बैंकर जगत सेठ शामिल थे.
15. मार्च, 1757 में अंग्रेजों ने फ्रांसीसी से चन्द्रनगर छीन लिया.
16. क्लाइव ने दावा किया कि ‘चन्द्रनगर की क्षति फ्रांसीसी के लिए इतनी भयंकर सिद्ध हुई जिसे व्यक्त नहीं किया जा सकता’.
17. ब्लैकहोल की घटना 20 जून, 1756 को कलकता में में घटी. इस समय बंगाल का नवाब सिराजुद्दौला (1756-57ई.) था. यह अलीवर्दी खां का दौहित्र (पुत्री का पुत्र) था. हालवेल के अनुसार नवाब ने 20 जून की रात 146 अंग्रेज बंदियों को 18 फुट लंबे, 14 फुट 10 इंच चौड़े कमरे में बंद कर दिया. अगले दिन हालवेल सहित मात्र 23 व्यक्ति जिन्दा बचे. यह घटना इतिहास में ब्लैक होल के नाम से प्रसिद्ध है.
18. तत्कालीन इतिहासकार गुलाम हुसैन ने अपनी पुस्तक ‘सियारुल मुत्खैरिन’ ने ब्लैक होल की घटना का कोई जिक्र नहीं किया है.
19. अलीनगर की सन्धि (9 फरवरी, 1757) बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला और क्लाइव की बीच हुई.
20. अलीनगर सिराजुद्दौला द्वारा कलकाता को दिया गया नया नाम था.
21. अंग्रेजों ने 2 जनवरी, 1757 को कलकाता पर पुन: अधिकार कर लिया.
22. अलीनगर की सन्धि के अनुसार नवाब ने अंग्रेजो को वह अधिकार पुन: प्रदान किया जो उन्हें सम्राट फर्रुखसियार के फरमान द्वारा मिला हुआ था.
23. अलीवर्दी खां ने ‘यूरोपियों की तुलना मधुमक्खियों से की और कहा कि यदि इन्हें न छोड़े जाए तो शहद देंगी और यदि छेड़ा जाए तो काट-काटकर मार डालेगी.
24. मुर्शिद कुली खां ने भूमि बंदोबस्त में इजारेदारी प्रथा प्रारंभ किया.
25. कंपनी के एक योग्य चिकित्सक विलियम हैमिल्टन,जिसने सम्राट फर्रुखसियर को एक प्राण घातक फोड़े से निजात दिलाई थी, सेवा से खुश होकर 1717 ई. में ईस्ट इण्डिया कंपनी के लिए एक फरमान जारी किया. जिसके द्वारा :क. बंगाल में कंपनी को 3000 रु. वार्षिक देने पर निशुल्क व्यापार का अधिकार दिया.ख. कंपनी को कलकाता के आस-पास भूमि किराए पर लेने का अधिकार दिया.ग. कंपनी द्वारा बंबई की टकसाल से जारी किए गए सिक्कों को मुगल साम्राज्य में मान्यता मिल गई.घ. सूरत में 10,000 रु. वार्षिक कर देने पर निशुल्क व्यापार का अधिकार प्राप्त हो गया.
26. प्लासी के युद्ध (23 जून, 1757) में सिराजुद्दौला के पराजय के बाद अंग्रेजों ने मीर जाफर को बंगाल का नवाब बनाया. इस उपलक्ष्य में उसने अंग्रेजों को उनकी सेवाओं के बदले 24 परगने की जमीन दारी से पुरस्कृत किया.
27. कर्नल मालसन ने लिखा है, कंपनी के अधिकारियों का अब एक ही उद्देश्य था कि ‘जितना लूट सको, लूटो; मीर जाफर सोने की एक थाली है जिसमें जब जी चाहे हाथ डाल लो.’
28. 1740 ई. में अलीवर्दी खां ने बंगाल के नवाब सरफराज खां (शुजाउद्दीन का पुत्र) को गिरिया के युद्ध में परास्त कर बंगाल की सूबेदारी प्राप्त कर ली.
29. मराठा सरदार रघुजी से 1751 ई. में संधि के द्वारा अलीवर्दी खां ने मराठों को उड़ीसा प्रांत और 12 लाख रुपये वार्षिक चौथ देने की बात स्वीकार की.
30. प्लासी के युद्ध (23 जून, 1757) में राबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में अंग्रेजों ने बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला को पराजित किया. युद्ध के परिणामस्वरूप अंग्रेजों का पूरे बंगाल पर नियंत्रण हो गया. क्लाइव ने मीरजाफर ने अंग्रेजों को उनकी सेवाओं के लिए 24 परगनों की जमींदारी से पुरस्कृत किया और क्लाइव को 2,34,000 पाउंड की निजी भेंट दी.
31. मीरजाफर के बाद मीर कासिम को बंगाल का नवाब नियुक्त किया गया.
32. मीर कासिम ने नवाब बनने के एवज में कंपनीको बर्दवान, मिदनापुर और चटगाँव की दीवानी प्रदान की तथा सिलहट के चुना व्यापार में कंपनी को आधा हिस्सा प्रदान किया.
33. इसने अपनी राजधानी मुर्शिदाबाद से मुंगेर स्थानान्तरित कर ली.
34. 22 अक्टूबर, 1764 ई. को हेक्टर मुनरों के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना ने ‘बक्सर के युद्ध’ में नवाब की संयुक्त सेना को पराजित किया.
35. बक्सर के युद्ध में विजय के बाद ही भारत में वस्तविक रूप से ब्रिटिश प्रभुसत्ता स्थापित हुई.
36. प्लासी के युद्ध 23 जून, 1757 ई. में विजय के पश्चात्य क्लाइव ने 29 जून, 1757 को मीरजाफर को बंगाल के नवाब के पद पर आसीन कराया. बंगाल की नवाबी प्राप्त करने के उपलब्ध में मीरजाफर ने कपनी को 24 परगने की जमींदारी तथा कंपनी सेना को अतिरिक्त भत्ता दिया गया. बंगाल के सभी फ्रांसीसी बस्तियों को जाफर ने अंग्रेजों को सौंप दिया.
37. मुर्शिदाबाद में मीरजाफर को ‘कर्नल क्लाइव का गीदड़’ कहा जता था.
38. मीर जाफर ने अंग्रेजों को इतने अधिक धन दिए की उसे अपने अपने महल से सोने-चाँदी के बर्तन भी बचने पड़े.
39. मीर जाफर ने क्लाइव को मुगल सम्राट आलमगीर द्वितीय से उमरा की उपाधि प्रदान करवाई.
40. बंगाल के कवि नवीनचन्द्र सेन के अनुसार प्लासी के युद्ध के बाद ‘भारत के लिए शाश्वत दुःख की काली रात’ का आरंभ हुआ.
41. ब्रिटिश इतिहासकार पर्सीवल स्पीयर ने इस काल (18वीं सदी) को ‘खुली और निर्लज्जतापूर्ण लूट-पाट का युग बताया है.
42. मीर कासिम ने अपनी सेना के आधुनिकीकरण के लिए एक जर्मन अधिकारी ‘वाल्टर रीन हार्ड’ (समरू नाम से प्रसिद्ध) की नियुक्ति की.
43. मैकाले लिखता है ‘कंपनी का प्रत्येक सेवक अपने आपको स्वामी समझता था और स्वामी अपने आपको कंपनी का ही रूप समझता था’.
44. बंगाल में 1765 ई. में द्वैध शासन की नींव क्लाइव ने रखी और 1772 ई. में वारेन हेस्टिंग्स ने इसे समाप्त कर दिया.
45. बंगाल सेना के उच्च जातीय सिपाहियों को उच्च जातीय भाड़े के सैनिक’ चार्ल्स नेपियर ने कहा था.
46. लॉर्ड डलहौजी के गवर्नर जनरल होने के समय तीन सैनिक विद्रोह हो चुके थे, 1849 में 22 वें एन. आई. का विद्रोह, 1850 में 66 वें एन. आई. का विद्रोह और 1852 में 38वें एन आई. का विद्रोह.
47. अमेरिकन मिशनरी सोसाईटी ने आगरे में के बहुत भारी मुद्रणालय लगाया.
48. 1854 ई. में डाक घर अधिनियम के पारित होने पर सैनिकों की निशुल्क डाक सुविधा समाप्त कर दी गई.
49. प्लासी के युद्ध (23 जून, 1757) के समय लार्ड क्लाइव ने कूटनीति का सहारा लिया. नवाब के विरुद्ध षडयंत्र में नवाब का प्रधान सेनापति मीर जाफर,यार लतीफ, दीवान राय दुर्लभ बंगाल का एक प्रभावशाली साहूकार जगत सेठ और अमीचंद एक विचौलिए के रूप में शामिल थे. मीर जाफर ने सिराजुद्दौला को पीछे हटने को कहा तथा नवाब 2000 घुड़सवारों सहित मुर्शिदाबाद लौट गया. इस प्रकार मीर जाफर ने पद की लालसा में राष्ट्र से गद्दारी की थी. युद्ध के बाद कंपनी को 24 परगने का जमींदारी प्राप्त हुई.
50. बुर्क ने क्लाइव को ‘बड़ी-बड़ी नींवे रखने वाला’ कहा जबकि प्रसिद्ध अंग्रेज इतिहासकार पर्सिवल स्पीयर ने उसे ‘भविष्य क अंग्रदूत’ कहा.
51. क्लाइव ने इंग्लैण्ड जाकर आत्महत्या कर ली.
