भारत में विदेशी व्यापारिक कंपनियों का आगमन I सामान्य अध्ययन I Objective questions answers for all exams
भारत में विदेशी व्यापारियों का आगमन
1.
भारत में यूरोपीय शक्तियों के आगमन का क्रम इस
प्रकार है :- पुर्तगीज>डच>अंग्रेज>डेन>फ्रांसीसी जबकि इन कंपनियों के
स्थापना वर्ष के अनुसार क्रम इस प्रकार है.
क.
एस्तादो द इण्डिया (पुर्तगीज कंपनी) -1498
ख.
वेरिंग दे ओस्ट इन्डिशे कंपनी (डच ईस्ट इण्डिया
कंपनी) – 1602
ग.
दि गवर्नर एण्ड कंपनी ऑफ़ मर्चेन्ट्स ऑफ़ ट्रेंडिंग
इन टू द ईस्ट इंडीज (अंग्रेजी ईस्ट इण्डिया कंपनी
– 1600
घ.
डेन ईस्ट इण्डिया कंपनी – 1616
ङ.
कंपनी देस इन्डेस ओरियंटलेस – 1664
2.
वास्कोडिगामा भारत के पश्चिमी तट पर स्थित
बंदरगाह कालीकट पर 20 मई, 1948 ई. को पहुंचा. उसने यहाँ पहुंचकर भारत के नए
समुद्री मार्ग की खोज की. कालीकट के तत्कालीन शासक जमोरिन ने वास्कोडिगामा का
स्वागत किया. वास्कोडिगामा के भारत आगमन से पुर्तगालियों एवं भारत के मध्य व्यापार
के क्षेत्र में एक नए युग का शुभारंभ हुआ. वास्कोडिगामा ने भारत में काली मिर्च के
व्यापार से 60 गुना अधिक मुनाफा कमाया, जिससे अन्य पुर्तगाल व्यापारियों को भी
प्रोत्साहन मिला. पुर्तगाली व्यापारियों ने भारत में कालीकट, गोवा, दमन, दीव एंव
हुगली के बंदरगाहों में अपनी व्यापारिक कोठियां स्थापित कीं.
3.
1505 में फ्रासिसको द अल्मीडा भारत में प्रथम
पुर्तगाली वायसराय बनकर आया.
4.
अल्मीडा के बाद अल्फ़ान्सो द अल्बुकर्क 1509 ई.
में वायसराय बनकर आया. उसने 1510 ई. में बीजापुरी शासक युसूफ आदिलशाह से गोवा
छिनकर अपने अधिकार में कर लिया. गोवा को पुर्तगालियों ने अपनी सत्ता और संस्कृति
के महत्वपूर्ण केन्द्र के रूप में स्थापित किया.
5.
मध्यकाल में सर्वप्रथम भारत से व्यापार संबंध
स्थापित करने वाले पुर्तगाली थे. प्रथम पुर्तगाली तथा प्रथम यूरोपीय यात्री
वास्कोडिगामा कई दिनों की समुद्री यात्रा के बाद ‘अब्दुल मजीद’ नामक गुजराती
पथ-प्रदर्शक की सहायता से 1498 ई. में कालीकट (भारत) के समुद्र तट पर पहुंचा. भारत
में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों के आगमन का क्रम है – पुर्तगीज, डच, अंग्रेज, डेन,
फ्रांसीसी. भारत में पुर्तगाली सबसे पहले 1498 ई. में आए तथा सबसे अंत में 1961 ई.
में वापस आए.
6.
ईस्ट इण्डिया कंपनी का आरंभिक नारा ‘भू-भाग नहीं,
व्यापार’ था.
7.
1661 ई. में पुर्तगालियों ने अपनी राजकुमारी
कैथरीन ब्रेगान्जा का विवाह ब्रिटेन के चार्ल्स द्वितीय से करके बंबई को दहेज के
रूप में दिया.
8.
1668 ई. में चार्ल्स द्वितीय ने बंबई का द्वीप 10
पौण्ड वार्षिक किराया लेकर ईस्ट इण्डिया कंपनी को दे दिया.
9.
22 अक्टूबर, 1764 को अंग्रेजों ने बंगाल के नवाब
मीर कासिम, अवध के नवाब शुजाउद्दौला तथा दिल्ली के मुगल सम्राट शाहआलम द्वितीय की
सम्मिलित सेना को बक्सर के युद्ध में परास्त किया. इस युद्ध में अंग्रेजों की कमान
मेजर हेक्टर मुनरो के हाथ में थी. इस युद्ध के परिणाम ने प्लासी के निर्णयों पर
मुहर लगा दी, भारत में अब अंग्रेजों को चुनौती देने वाला कोई दूसरा नहीं था.
इलाहाबद तक का प्रदेश अंग्रेजों के अधिकार में आ गया तथा दिल्ली विजय में मार्ग
खुल गया. बक्सर का युद्ध भारतीय इतिहास में निर्णायक सिद्ध हुआ. पी. ई. राबर्ट्स
ने बक्सर के युद्ध के बारे में कहा है कि – ‘प्लासी की अपेक्षा बक्सर को भारत में
अंग्रेजी प्रभुता की जन्मभूमि मानना कहीं अधिक उपयुक्त है.’ यदि बक्सर के युद्ध के
परिणाम को देखा जाए तो कहा जा सकता है कि जहाँ प्लासी की विजय अंग्रेजों की
कूटनीति का परिणाम थी, वहीँ बक्सर की विजय को इतिहासकारों ने पूर्णत सैनिक विजय
बताया. प्लासी के युद्ध ने अग्रेजों की प्रभुता बंगाल में स्थापित की परन्तु बक्सर
के युद्ध ने कंपनी को एक अखिल भारतीय शक्ति का रूप दे दिया.
10.
फ्रैंको मार्टिन और वेलांग द लेस्पिनो ने 1673 ई.
में वलिकोंडापुरम के मुस्लिम सूबेदार शेर खां लोदी से बेक छोटी सा गाँव प्राप्त
करके एक फ्रांसीसी बस्ती स्थापित की, जिसे पांडिचेरी के नाम से जाना जाता है. यह
पूरी तरह किलाबन्द था. फ्रैंको मार्टिन 1674 ई. में इस बस्ती का प्रमुख हुआ.
11.
फ्रासं के सम्राट लुई ixv के समय 1664 ई. में
फ्रांसीसी व्यापारिक कंपनी ‘कंपनी द इंड ओरिएंटल’ की स्थापना हुई.
12.
भारत में फ्रांसीसियों की पहली कोठी फ्रैंकोकैरो
द्वारा सन् 1668 ई. में सूरत में स्थापित हुई.
13.
कर्नाटक के युद्ध अंग्रेज और फ्रांसीसियों के बीच
हुआ.
14.
पुर्तगालियों द्वारा भारत में ‘गोथिक’ स्थापत्य
कला का आगमन हुआ.
15.
डचों ने पुलीकट में अपने स्वर्ण निर्मित ‘
पैगोडा’ सिक्के का प्रचलन करवाया.
16.
1813 के चार्टर एक्ट द्वारा कंपनी के भारतीय
व्यापार के एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया, यद्दपि उसका चीन तथा चाय के व्यापार
पर एकाधिकार बना रहा. 1833 के चार्टर एक्ट के द्वारा कंपनी का व्यापारिक अधिकार
चाय और चीन से भी समाप्त कर दिया गया तथा उसे भविष्य में केवल राजनैतिक कार्य ही
करने थे.
17.
1813 के चार्टर एक्ट के अनुसार कंपनी को भारत में
शिक्षा पर एक लाख रुपया खर्च करने का प्रावधान था.
18.
1833 के चार्टर एक्ट के अनुसार बंगाल का गवर्नर
जनरल भारत का गवर्नर जनरल भारत का गवर्नर जनरल बना दिया गया.
19.
1833 के चार्टर एक्ट द्वारा कानून बनाने के लिए
गवर्नर जनरल की परिषद में एक कानूनी सदस्य चौथे सदस्य के रूप में सम्मिलित किया
गया.
20.
1639 ई. में फ्रांसिस डे नामक अंग्रेज को
चंद्रगिरी के राजा से मद्रास पट्टे प्राप्त हुआ. यहीं पर अंग्रेजों ने ‘फोर्ट सेंट
जार्ज’ नामक किले की स्थापना की.
21.
1641 ई. में कोरोमंडल तट पर फोर्ट सेंट जार्ज
कंपनी कला मुख्यालय बना. मद्रास अंग्रेजी
की पहली प्रेसिडेन्सी थी.
22.
1658 ई. तक बंगाल, बिहार, उड़ीसा और कोरोमंडल की
समस्त अंग्रेज फैक्ट्रियाँ फोर्ट सेंट जार्ज (मद्रास) के अधीन आ गई.
23.
बंगाल के सूबेदार शाहशुजा द्वारा दिए गए एक विशेष
फरमान द्वारा 1651 ई. में अंग्रेजों को 3000 रु. वार्षिक कर देने पर बंगाल में
व्यापार का विशेषाधिकार प्राप्त हुआ.
24.
मुगल बादशाह औरंगजेब और अंग्रेजों के बीच पहली
भिडंत 1686 ई. में हुगली में हुई.
25.
कार्नवालिस के समय दस्तक की सुविधा को समाप्त कर
दिया गया.
26.
ब्लैक होल की घटना 20 जून, 1756 को हुई थी.
27.
फर्रुखशियर द्वारा 1717 ई. में जारी फरमान को
ओर्म ने ‘कंपनी का महाधिवक्तापत्र (मैग्नाकार्टा) की संज्ञा दी.
28.
प्रथम पुर्तगाली अभियान के नेता वास्कोडिगामा
(1498) था जबकि 1500 ई. में द्वितीय (वाणिज्यक) अभियान का नेता आलवरेज काब्राल था.
29.
1502 ई. में वास्कोडिगामा दूसरी बार भारत आया.
30.
नीनो डी कुन्हा ने 1530 ई. में सरकारी कार्यालय
कोचीन से गोवा स्थानंतरित कर दिया.
31.
केवल गोवा, दमन और दीव 1961 ई. तक पुर्तगालियों
के अधिकार में रहा.
32.
भारत में पुर्तगाली शक्ति का वास्तविक संस्थापक
अल्बकुर्क (1509-15 ई.) था. इसने भारत में एक प्रादेशिक शक्ति के रूप में
पुर्तगाली राज्य की स्थापना की.फरवरी, 1510 में बीजापुरी के आदिलशाह सुल्तान से
गोवा को जीतना अल्बुकर्क की पहली महत्वपूर्ण उपलब्धि थी. गोवा की विजय ने
दक्षिण-पश्चिमी समुद्र तट पर पुर्तगाली नौ सैनिक प्रभुत्व पर मोहर लगा दी और इसके
साथ ही भारत में पुर्तगालियों की संख्या में वृद्धि करने एवं उनकी स्थायी बस्तियां
बसाने के उद्देश्य से पुर्तगालियों को भारतीय महिलाओं के साथ विवाह करने के लिए
प्रोत्साहित किया.
33.
1632 ई. में गोलकुंडा के सुल्तान ने अंग्रेजी को
एक फरमान के द्वारा गोलकुंडा के बंदरगाहों पर व्यापार करने की अनुमति दे दी इसके
बदले में ब्रिटिश कंपनी को 500 पैगोडा वार्षिक कर देता था. यह फरमान अत्यंत
लाभकारी होने के कारण इसे सुनहरा फरमान कहा गया.
34.
1639 ई. में फ्रासिंस डे नामक अंग्रेज ने चन्द्रगिरी
के राजा से मद्रास को पट्टे प्राप्त किया और वहाँ फोर्ट सेंट जार्ज नामक किले की
स्थापना की.
35.
बंगाल के सूबेदार शाहशुजा द्वारा दिए गए एक विशेष
फरमान द्वारा 1651 ई. में अंग्रेजों को 300 रु. वार्षिक कर देने के बदले बंगाल में
व्यापार का विशेषाधिकार प्राप्त हुआ.
36.
1698-99 ई. में बंगाल के सूबेदार अजीमुश्शान की
अनुमति केबाद कपनी को 1200 रु. देने पर सुतानती, गोविदंपुर और कोलिकाता की
जमींदारी प्राप्त हो गई.
37.
कालक्रमानुसार घटना का बढ़ता हुआ क्रम इस प्रकार
है : - प्लासी का युद्ध – 1757, वाण्डीवाश का युद्ध – 1760 ई. और बक्सर का युद्ध –
1764 ई.
38.
प्लासी के युद्ध में अंग्रेजी सेना ने बंगाल के
नवाब सिराजुद्दौला को पराजित किया.
39.
वाण्डीवाश में अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच
निर्णायक युद्ध हुआ जिसमें फ्रांसीसी सेना परजित हो गई.
40.
बक्सर के युद्ध में अंग्रेजी सेना ने अवध के
नवाब, मुगल सम्राट और मीरकासिम की संयुक्त सेना को पराजित कर दिया.
1661 ई. में इंगलैण्ड के सम्राट चार्ल्स द्वितीय का विवाह पुर्तगाल की
राजकुमारी कैथरीन से होने पर चार्ल्स को बंबई उपहार के रूप में प्राप्त हुआ था जिसे
उन्होंने 1668 ई. में 10 पौण्ड वार्षिक किराए पर ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी को दे
दिया था.