1.
एक वर्षी फसलें – जो अपना जीवन –
चक्र एक वर्ष में पूरा कर लेते हैं – जैसे गेहूँ धान, मक्का, ज्वार, बाजरा.
2.
द्विवर्षी फसलें – वे फसलें जो अपना
जीवन-चक्र दो वर्षों में पूरा करते हैं. जैसे चुकन्दर
3.
बहुवर्षी फसलें – वे फसलें, जो अपना
जीवन-चक्र दो वर्षों से अधिक समय में पूरा करते हैं – जैसे निपियर, घास, रिजका
B. ऋतुरों के आधार पर
1.
खरीफ फसलें – जून – जुलाई में
बोयी जाने वाली फसलें जिनके लिए उच्च तापक्रम और आर्द्रता की आवश्यकता होती है.
जैसे धान, मक्का, ज्वार, बाजरा,कपास, मूंगफली, उड़द
2.
रबी फसलें – इन फसलों के
अंकुरण और प्रारंभिक वृद्धि के लिए कम तथा पकने के लिए उच्च ताप की आवश्यकता होती
है. ये अक्टूबर-नवम्बर में बोई जाती है. जैसे गेहूँ, जो, जई, चना, मटर, मसूर, लाही
सरसों, बरसीम, आलू
3.
जायद फसलें – इसके लिए अधिक
तापक्रम तथा अधिक प्रकाश काल की आवश्यकता होती है. इसकी बुवाई फरवरी-मार्च में की
जाती है. जैसे खरबूज, तरबूज, ककड़ी एवं कई प्रकार की सब्जियाँ.
C. विशेष उपयोग के आधार पर
1.
नकदी फसलें – इन्हें बेचकर
किसान अन्य आवश्यकताओं के लिए धन कमाता है. जैसे आलू, गन्ना, कपास, तम्बाकू
2.
अन्तरवर्ती फसलें – दो फसलों के बीच खाली समय में उगाई जाने वाली
फसलें जैसे – मूँग, जीरा
3.
कीट आकर्षक फसलें – मुख्य फसल को
कीटों से बचाने के लिए उसके चारों तरफ लगायी जाने वाली फसलें. जैसे- कपास के खेत
में चारों तरफ भिण्डी की फसल कपास को लाल कीट से बचाने के लिए लगायी जाती है.
4.
आवरण फसलें – इस वर्ग में फसलें
भूमि को आच्छादित कर अपरदन से बचाती है. जैसे – मूँग, उड़द, लोबिया
5.
हरी खाद फसलें – मृदा में कार्बनिक
पदार्थ बढ़ाने के लिए इन फसलों को उगाकर जमीन में दबा दिया जाता है. जैसे – सनई,
ढैचा, मूंग, उड़द, लोबिया
D. आर्थिक महत्त्व के आधार पर
1.
धान्य फसलें या अनाज की फसलें – इन फसलों के दाने अनाज के रूप में खाने के काम
आते हैं. जैसे –धान, गेहूँ, मक्का, जौ, ज्वार, बाजरा
2.
दलहनी, फसलें – इन फसलों के बीजों
का मुख्य रूप से प्रोटीन के स्रोत के रूप में प्रयोग किया जाता है. जैसे – मूंग,
उड़द, चना, मसूर, सोयाबीन, तिल
3.
रेशेदार फसलें – इन फसलों से रेशे
प्राप्त होते हैं जिससे कपड़ा, बोरे, टाट और रस्सा आदि तैयार होते हैं. जैसे –
कपास, जूट, पटसन सनई
4.
चारे की फसलें – इन फसलों से पशुओं
के लिए चारा प्राप्त होता है. जैसे – बाजरा, कुल्थी, ज्वार, लोबिया, सोंठ, मक्का,
बरसीम, जाई, नेपियर घास, गिनी घास, सैंजी
5.
शर्करा की फसलें – इन फसलों से
शर्करा की प्राप्ति होती है. जैसे – चुकन्दर, गन्ना
6.
मसाले की फसलें – खुशबू और स्वाद के
लिए इनका प्रयोग किया जाता है. जैसे – जीरा, धनिया, आजवायन, सौंफ, पुदीना, हल्दी,
अदरख, मेंथी, प्याज, मिर्च, लहसून, तेजपाता, इलायची
7.
उद्दीपक फसल – चाय, मिर्च,
लहसून, कॉफ़ी इस वर्ग के फसलों के सेवन से उत्तेजन पैदा होती है.
8.
फल वाली फसल – खरबूजा, तरबूजा,
ककड़ी, खीरा आदि फल वाली फसलें हैं.
9.
औषधि वाली फसलें – इनका उपयोग औषधि
के रूप में किया जाता है. जैसे – भिण्डी, कद्दू, करेला, सेम, गोभी चुकन्दर, बैगन,
टमाटर, मटर, सलाद, पालक.