सिक्ख संप्रदाय का इतिहास I GK I Objective Questions answers


सिक्ख संप्रदाय

    1.            सिक्ख धर्म की नींव गुरु नानक ने पंजाब में डाली. 
    2.            इन्होंने नानक पंथ चलाया और इन्हीं के शिष्य सिक्ख कहलाए. 
    3.            इन्होंने अपने एक शिष्य लहना को अपना उत्तराधिकारी बनाया, जो        अंगद नाम से दूसरे गुरु बने. 
    4.            गुरु अंगद जाति के खत्री थे. 
    5.           गुरु नानक द्वारा प्रारंभ किया गया लंगर व्यवस्था को अंगद ने           नियमित किया. 
    6.            अंगद को गुरुमुखी का आविष्कारक माना जाता है. 
    7.            गुरुनानक का जन्म तलवंडी नामक स्थान पर 1469 ई. में हुआ          और रावी नदी के किनारे. 
    8.            इनके पिता के नाम कालूजी था और माता का नाम तृप्ता था. 
    9.            गुरु अमरदास ने अपनी गद्दी गोइंदवाल में स्थापित की. 
10.            गुरु अमरदास ने अपने उपदेशों का प्रचार प्रसार करने के लिए 22         गद्दियों की स्थापना की और प्रत्येक गद्दी में एक-एक महंत की           नियुक्ति की. 
11.            मुगल सम्राट अकबर गुरु अमरदास से मिलने गोइंदवाल गया था. 
12.            अमृतसर सरोवर’ के बीच ‘’हरमंदिर साहिब’ जिसे ‘गोल्डेन टेंपल’ के         नाम से जाना जाता है, का निर्माण गुरु अर्जुन देवे ने करवाया था. 
13.            इन्होंने रामदासपुर में अमृतसर एवं संतोषसर नामक तालाब निर्मित        करवाए. 
14.            अर्जुन देव ने तरनतरन तथा करतारपुर नामक नगर का निर्माण           करवाया. 
15.            गुरु अर्जन देव ने नगर निर्माण के लिए अपने अनुयायियों को पैसा        वसूलने के लिए भेजा जो मंसद एवं मेउरा कहे जाते थे. 
16.            1604 ई. में अर्जुन देव ने ‘आदिग्रंथ’ की रचना की. 
17.            खुसरो को समर्थन करने के कारण जहाँगीर ने 1606 ई. में इन्हें          मृत्युदंड दे दिया. 
18.       फरवरी, 1921 में गुरु नानक के जन्म स्थान ननकाना के गुरुद्वारे       में पहली बार अकाली आन्दोलन को रक्तपात से गुजरना पड़ा.           इसके बाद तोशाखाना गुरुद्वारे काण्ड (1921ई.) हुआ जिसमें             तोशाखाना की चाबी को लेकर छिड़े विवाद में अकालियों की शानदार       जीत हुई. 
19.            गुरु का बाग संघर्ष अगस्त, 1922 में हुआ. 
20.            ननकाना गुरुद्वारे को मुक्त कराने वाले करतार सिंह झब्बर के           शब्दों में ‘ननकाना कांड ने सिक्खों को जगा दिया और स्वराज के         लिए ‘मार्च’ और तेज हो गया. 
21.            तोशाखाना की चाबी को लेकर छिड़े विवाद के समय शिरोमणि            गुरूद्वारे प्रबंधक समिति के अध्यक्ष खड्ग सिंह थे. 
22.            अकाली आन्दोलन के इतिहासकार डॉ. मोहिन्दर सिंह के शब्दों में,        ‘विदेशी हुकुमत से देश को आजाद करने की भावना ने ही पंजाब          सूबे के सिक्खों, हिन्दुओं और मुसलमानों को अकाली आन्दोलन के         झंडे तल एकताबद्ध किया’. 
23.            गुरु गोबिंद सिंह ने 1699 ई. में खालसा पंथ की स्थापना की. 
24.            खालसा का अर्थ है शुद्ध या विशेष. 
25.            गुरु गोबिंद सिह ने ‘पाहुल प्रणाली’ को प्रारंभ किया. 
26.            गुरु गोबिंद सिंह ने सिक्ख अनुयायियों से पांच वस्तुएँ धारण करने         को कहा – केश, कड़ा, कृपाण, कच्छा और कंघा. 
27.            गुरु गोबिंद सिंह की आत्मकथा का नाम ‘विचित्रनाटक’ है. 
28.            कृष्ण अवतार’ एवं ‘चंदीदीवार’ की रचना भी गुरु गोबिंद सिंह ने           किया. 
29.            गुरु हरकिशन 1661 ई. तक सिक्खों के गुरु थे.  
30.            इनकी मृत्यु चेचक से हुई.  
31.            गुरु तेगबहादुर (1664 ई. से 1675 ई.) सिक्खों के नौवें गुरु थे.  
32.            सिक्खों के दसवें एवं अंतिम गुरु गोविन्द सिंह (1675 ई. से 1708       ई.) थे. बन्दा बहादुर (1708 ई. से 1716 ई.) सिक्खों क पहला           राजनीतिक नेता हुआ. इसने प्रथम सिक्ख राज्य की स्थापना की. 
33.            बन्दा बहादुर के बचपन का नाम लक्ष्ण देव था. 
34.            गुरुगोबिंद सिंह ने इसका नाम गुरुबख्श सिंह रखा. 
35.            तेगबहादुर नबे अपना स्थान अमृतसर की जगह मखोवाली को            बनाया. 
36.            तेगबहादुर ‘बाकसाद-ए-बाबा’ के नाम से भी जाने जाते थे. 
37.            चकमौर के युद्ध (1705 ई.) में गोबिंद सिंह के दो बेटे अजीत सिंह         एवं जुझारू सिंह मारे गए. 
38.            गुरु गोबिंद सिंह के नेतृत्व में सिक्ख राजनैतिक व सैनिक शक्ति          के रूप में संगठित हुए. 
39.            हालांकि गुरु हरगोबिंद ने अपने शिष्यों को सैनिक शिक्षा प्रारंभ की        लेकिन एक राजनैतिक शक्ति के रूप में गुरु गोबिंद सिंह ने              संगठित किया. श्रीनगर के शासक फतेहशाह को भगनी के युद्ध में        पराजित करने के बाद गुरु गोबिंद सिंह ने सुरक्षा की दृष्टि से चार        किले बनवाने के आदेश दिए. ये किले आनंदपुर और कीरत पुर के         मध्य स्थित हैं – फतेहगढ़, आनन्दगढ़, केशगढ़, और लौहगढ़. 
40.            बन्दा बादुर ने गुरु नानक और गुरु गोबिंद सिंह के नाम के सिक्के        चलवाए और सिक्ख राज्य की मुहर बनवाई.  
41.            बन्दा बहादुर की मृत्यु के बाद सिक्खों में शरबत खालसा और            गुरुमत्ता प्रथाओं का प्रचलन हुआ. 
42.            इकट्ठे होने को शरबत खालसा जबकि निर्णय को गुरुमत्ता कहा            गया. 

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