क्या आप इन बातों को जानते हैं


क्या आप इन बातों को जानते हैं

1.    प्रचलन :- गति जीवों का  एक खास लक्षण है. जीवों में गति का यह लक्षण प्रचलन कहलाता है. शायद आपको मालूम नहीं होगा कि कोरल और स्पंज जंतु होते हुए भी एक ही स्थान पर स्थिर रहते हैं.
2.    उद्दीपन – धूल, गर्मी, ध्वनि, गंध,शरीर में किसी चीज का चुभना आदि जो भी जीव-जंतुओं को एक खास तरह की क्रिया के लिए मजबूर करते हैं – उद्दीपन कहलाते हैं.
3.    अनुक्रिया – उद्दीपन के कारण जीव-जन्तु जो भी करते हैं वह अनुक्रिया कहलाती हैं.
4.    छुईमूई/लाजवंती – इसकी पत्ति को छूते ही ये सिकूड़ जाती है.
5.    प्रजनन – प्रत्येक जीव अपने जैसे दूसरे जीवों का निर्माण करता है. इसी को प्रजनन कहते हैं.
6.    दाब लगाना (लेपरिंग) – नीबू या अंगूर के पौधों की निचली शाखा के थोड़े से भाग की छाल को निकालकर उसे झुका कर नम मिट्टी में दबा दो. कई महीने के बाद इस भाग पर जड़े निकल आएंगी. इस विधि को दाब लगाना कहते हैं.
7.    कलम – माली को गुलाब या नीलकंठ आदि की डाली को काटकर मिट्टी में गाड़ते हुए देखा होगा. कुछ दिनों के बाद इसे निचले भाग से जोड़ निकल आती है. इसे कलम लगाना कहते हैं.
8.    कली रोपण – गुलाब के एक पौधे की कली को उसके छाल के साथ काटकर दूसरे पौधे से गड्ढा करके लगाओं एवं उस स्थान पर मिट्टी बांध दो. कुछ दिनों के बाद कली से नयेपौधे उत्पन्न होंगे. इसे कली रोपण कहते हैं.
9.    निवास स्थान – जिस परिवेश में जीव-जन्तु प्राय अपना समय बिताते हैं, वह उनका निवास-स्थान कहलाता है.
10.                      अनुकूलन – प्रत्येक जीव का कुछ खास लक्षण भी होता है जिसके कारण वह अलग – अलग वातावरण में जीवनयापन करने के लिए सक्षम होता है. इसे ही अनुकूलन कहते हैं.
11.                      वाटर स्केटर्स – पानी की सतह पर कुछ कीट तैरते हुए दिखाई पड़ेंगे. इनकीटों को वाटर स्केटर्स कहते हैं.
12.                      वाटर वोटमैन – कुछ जलकीटों के पैर पतवार के समान लम्बे होते हैं. इन्हें वाटर वोटमैन कहते हैं.
13.                      स्वीम ब्लाडर – मछली पानी में तैरने के लिए इस स्वीम ब्लाडर में हवा भरकर अपने शरीर को हल्का करती है.
14.                      उभयचर – मेढ़क वह भूमि तथा पानी दोनों जगह रहने के लिए अनुकूलित है. ऐसे जंतु को उभयचर कहते हैं.
15.                      वायुकोष – जल में पाये जाने वाले पौधे के तने स्पंजी होते हैं तथा उनके तने और पत्तियों में वायुकोष होते हैं. वायुकोष में हवा भरी रहने के कारण पौधों हल्के होकर पानी में उतराते रहते हैं. पत्तियाँ अधिक कटी-कटी होती है. जललीली की पत्ति को देखो. इसके ऊपर मोमिया परत होती है. जो इसे भींगने से बचाती हैं.
ऊंट को रेगिस्तान का जहाज होता है.

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