नमस्कार दोस्तों अगर यह पोस्ट मानव शरीर की अस्थियाँ के विषय में रोचक
जानकरी मिलेगी जो शायद आप नहीं जानते होंगे. इस पोस्ट को पूरा पढ़ेंगे और इनके इसके
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मानव शरीर और उनके अस्थियों के विषय में बहुत ही रोचक जानकारी
1. मानव शरीर का ढांचा
अस्थियों का बना होता है.
2. अस्थियाँ शरीर को
निश्चित आकृति देती है.
3. शरीर में ये एक
निश्चित क्रम में एक-दूसरे से जुड़ी हुई है.
4. शरीर की सभी
अस्थियाँ और उपस्थियां मिलकर कंकालतंत्र का निर्माण करता है.
5. हमारे शरीर में लगभग
208 हड्डियाँ है.
6. अस्थियाँ कड़ी, मजबूत
और सफ़ेद रंग की होती है.
7. उपअस्थिया लचीली तथा
मुलायम होती है.
8. कान का बाहरी अंग
(पिन्ना) उपस्थियाँ का बना होता है.
9. मानव कंकाल में
खोपड़ी रीढ़ की अस्थि पसलियाँ तथा हाथ-पैर की अस्थियाँ तथा हाथ-पैर की अस्थियाँ
प्रमुख है.
10.
खोपड़ी शरीर के सबसे ऊपरी भाग में उपस्थित होता.
11.
खोपड़ी के दो भाग होते हैं 1. कपाल और 2. चेहरा
12.
कपाल की अस्थियाँ इस प्रकार जुड़ी होती है कि वे
स्थिर है.
13.
अस्थियों के ऐसा जोड़ अचल संधि कहलाती है.
14.
उपरी जबड़ा तथा निचला जबड़ा चेहरे की अस्थियों
द्वारा ही बना होता है.
15.
ऊपरी जबड़ा चेहरे की अस्थियाँ द्वारा ही बना होता
है.
16.
ऊपरी जबड़ा अचल है जबकि निचले जबड़े को
हिलाया-दुलाया जा सकता है.
17.
खोपड़ी का निचला हिस्सा धड़ से जुड़ा रहता है.
18.
आपको एक लंबी अस्थि का आनुभव होगा जिसे रीढ़ की
अस्थि कहते हैं.
19.
रीढ़ की अस्थि के मेरुदण्ड भी कहते हैं.
20.
रीढ़ की अस्थि अनेक छोटी-छोटी छ्लेदार अस्थियों की
बनी होती है.
21.
इनमें से प्रत्येक को कशेरुक कहते हैं.
22.
कशेरुक के बीच में कुल 33 कशेरुक हैं.
23.
सभी कशेरुक आपस से इस तरह जुड़े रहते हैं कि बीच
की खाली जगहों से रीढ़ की अस्थि में एक लंबी नली बनी रहती है.
24.
इसी नली में मस्तिष्क का निचला भाग मेरुरज्जु
25.
के रूप में प्रवेश करता है और यह शरीर के नीचले
भाग तक जाता है.
26.
रीढ़ की अस्थि मेरुरज्जु की रक्षा करती है.
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27.
रीढ़ की अस्थि छाती की अस्थि तथा इन पसलियों से
घिरी खाली जगह को वक्ष गुहा कहते हैं.
28.
वक्षगुहा में हृदय तथा फेफड़े सुरक्षित रहते हैं.
29.
दो अस्थियो के आपस में मिलने के स्थान को जोड़ या
संधि कहते हैं.
30.
शरीर में ऐसी अनेक अस्थियाँ हैं जहाँ जुड़ी हुई
अस्थियों को घुमाया जा सकता हैं और ऊँगली कलाई केहुनी की संधियाँ इस प्रकार की
होती हैं. इसे चल संधि कहते हैं.
31.
कुछ ऐसी सन्धियाँ हैं जिनमे गति संभव नहीं हैं,
उन्हें अचल संधियाँ कहते हैं, जैसे खोपड़ी की अस्थियाँ ऊपरी जबड़ा आदि.
32.
चाप के आकार की अस्थियाँ अधिक भार सहन कर सकती है
जैसे पैर आदि की मांसपेशियों को तुम जब चाहो इच्छा के अनुसार संचालित कर सकते हैं.
ऐसी मांसपेशियों को ऐसी ऐच्छिक मांसपेशियां कहते हैं.
33.
मगर शरीर में कुछ ऐसी मांसपेशियां भी हैं, हमारी
इच्छा अनुसार संचलित नहीं होती है. वे स्वतन्त्र रहकर कार्य करती है, तो उन्हें
अनैच्छिक मांसपेशियां कहते हैं – जैसे ह्रदय की धडकन के बन्द नहीं कर सकते, ये
मांसपेशियां स्वतंत्र होकर अपना काम करती है.
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