भारतीय संविधान पर विदेशी संविधान का प्रभाव I Effect of foreign constitution on Indian constitution
भारतीय संविधान पर विदेशी संविधान
का प्रभाव
1. भारत में
न्यायिक पुनरीक्षण की संकल्पना संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से ली गई है.
इसका आशय है कि सवोच्च न्यायालय विधानों एवं आदेशों का न्यायिक पुनर्विलोकन कर
सकता है तथा उन विधानों एवं आदेशों को शून्य घोषित कर सकता है.जो संविधान के
प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं.
2. भारतीय संविधान में संघात्मक
व्यवस्था कनाडा के संविधान से ली गई है.
3. भारतीय
संसदीय प्रणाली में न्यायिक पुनर्विलोकन की प्रणाली है जबकि ब्रिटेन में यह
प्रणाली नहीं लागू है. इस अर्थ में भारतीय संसदीय प्रणाली ब्रिटेन से भिन्न है.
इसके अतिरिक्त वास्तविक एवं नाममात्र की कार्यपालिका,सामूहिक उत्तरदायित्व तथा
द्विसदनीय विधायिका भारत एवं ब्रिटेन दोनों की संसदीय प्रणालियों में लागू है.
4. न्यायिक
पुनर्विलोकन की व्यवस्था भारत और यू. एस. ए. दोनों में हैं. वस्तुतः भारतीय
संविधान में न्यायिक पुनर्विलोकन की संकल्पना यू. एस. ए. के संविधान से ही ली गई
है. इसका अर्थ है कि सर्वोच्च न्यायालय उन विधानों एवं आदेशों को शून्य घोषित कर
सकता है जो संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं
5. संविधान के निर्वचन के लिए
परिसंघीय उच्चतम न्यायालय भारत एवं अमेरिका में समान रूप से पाया जाता है. एकल
नागरिकता, संविधान की तीन सूचियाँ भारत में पायी जाती है, जबकि अमेरिका में दोहरी
नागरिकता है. अमेरिका में न्यापालिका की द्वैध संघ एवं राज्य स्तर पर) है, जबकि
भारत में एकल न्यायपालिका है.
6. अमेरिका
के संविधान में संघीय प्रणाली का स्पष्ट उल्लेख है. भारत के संविधान में भारत को
राज्यों के संघ बताया गया है, किन्तु संविधान के कतिपय प्रावधान राज्यों की
अपेक्षा केन्द्र को ज्यादा शक्तिशाली बनाने पर जोर देते हैं. इससे कुछ विद्वान
भारत के संविधान को संघात्मक एवं एकात्मक प्रणालियों का लक्षण लिए हुए मूल रूप से
संघीय संविधान है, ऐसा मानना ज्यादा उचित है.
7. भारत
के संविधान में समवर्ती सूची को आस्ट्रेलिया से लिया गया है. इस सूचि में ऐसे विषय
शामिल हैं, जिन पर केन्द्र और राज्य दोनों को कानून बनाने का अधिकार है. इसे
सातवीं अनुसूची में शामिल किया गया है.
8. भारतीय
संविधान में राज्य के नीति निर्देशक तत्वों की संकल्पना आयरलैड के सविधान पर
आधारित है. संविधान में इसे भाग 4 में अनुच्छेद 36 से अनुच्छेद 51 तक में उपबंधित
किया गया है.
9. राज्य
सभा के गठन में प्रतिभा, अनुभव एवं सेवा को प्रतिनिधित्व देने में भारतीय संविधान
निर्माता आयरिश (आयरलैंड) से प्रभावित हुए थे.
10. मूल अधिकार – अमेरिका
11. शासन
की संसदीय प्रणाली – ग्रेट ब्रिटेन
12. आपात
उपबन्ध – जर्मनी का वीमर संविधान
13. राज्य
नीति के निर्देशक तत्व – आयरलैंड
14. संघ-राज्य संबंधों की
समवर्ती सूची- आस्ट्रेलिया
15. भारत
राज्यों का संघ है तथा संघ में अधिक शक्ति निहित है – कनाडा
16. मूल
कर्तव्य (अनुछेद 51-क) मूलतः अंगीकृत संविधान के भाग में नहीं थे. इन्हें 42 वें
संविधान संशोधन 1976 द्वारा समिलित किया गया. ये मूल कर्तव्य पूर्व सोवियत संघ के
संविधान से लिए गए.
17. भारतीय
संविधान में सन्निहित मूल अधिकारों की अवधारणा, सर्वोच्च नयायालय का संगठन एवं
शक्तियां तथा उपराष्ट्रपति का पद संयुक्त राज्य अमेरिका से लिया गया है. जबकि
फ़्रांस से गणतंत्र, ब्रिटेन से संसदीय प्रणाली तथा पूर्व सोवियत संघ से मौलिक
कर्तव्यों का विचार लिया गया है.