विज्ञान की रोचक जानकारी
1. ऐसी वस्तु जिनसे प्रकाश की किरणें पार नहीं कर पाती अपारदर्शक कहलाती हैं जैसे गत्ता, लकड़ी, ढक्कन, प्लेट आदि अपादर्शक वस्तुएँ हैं .2. ऐसी वस्तुएं जिनसे प्रकाश की किरणें पार कर जाती हैं पारदर्शक कहलाती है. यहाँ शीशा, पतला, पालीथिन तथा पानी पारदर्शक कहलाती है. यहाँ शीशा, पतला पालीथीन तथा पानी पारदर्शक वस्तुएँ हैं.3. ऐसी वस्तुएँ जिनसे प्रकाश की किरणें कुछ अंश तक ही पार कर सकती हैं पारभसक अथवा अर्द्धपारदर्शक कहलाती है. तुमने ट्रेसिंग पेपर और बटर पेपर का नाम सुना होगा. येस भी पारभासक होते हैं.4. जब प्रकाश-स्रोत छोटा रहता है तब वस्तु की छाया साफ और स्पष्ट बनती है, परन्तु जब प्रकाश स्रोत बड़ा रहता है तब बस्तु की छाया साफ और स्पष्ट नहीं बनती हैं.5. आपको अनुभव होगा कि धूप में तुम्हारी छाया हमेशा सूर्य के विपरीत दिशा में बनती है. मकान और आस-पास के वृक्षों की छाया भी इसी प्रकार सूर्य के विपरीत दिशा में बनती है. छाया हमेशा ही प्रकाश स्रोत के विपरीत दिशा में बनती है.6. ऐसी उपकरण जिससे छाया की स्थिति तथा लम्बाई से समय की जानकारी मिल जाए धूप-घड़ी (सन डायल) कहलाता है.7. सूर्य चन्द्रमा और तारों के अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक को खगोल शास्त्री कहते हैं.8. कोई पदार्थ जिस स्रोत से पाया जाता है उसे संसाधन कहते हैं और प्राप्त पदार्थ संपदा कहलाता है.9. जितने संसाधनों के बारे में जानकारी प्राप्त की वे सब के सब प्रकृति में पाए जाते हैं. इसलिए प्राकृतिक संसाधन कहते हैं.10. कोयला, पेट्रोलियम आदि की क्षतिपूर्ति करना मानव के हाथ में नहीं है. अत ऐसे प्राकृतिक संसाधनों को अनवीकरणीय कहते हैं.11. नदी, तालाब, पोखर, समुद्र, महासागर आदि पानी के स्रोत संसाधन हैं.12. ऐसे संसाधन को नवीकरणीय कहते हैं. इस तरह से प्राकृतिक संसाधनों में कुछ नवीकरणीय हैं और कुछ अनवीकरणीय.13. किसी प्राकृतिक संसाधन का आवश्यकता के अनुसार समझदारी से उपयोग करना है संरक्षण कहलाता है.14. किसी वस्तु को खींचना और धकेलना ही बल कहलाता है.15. हाथ से लगाया बल को पेशीय बल कहते हैं.16. पृथ्वी अपनी ओर किसी वस्तु को खींचती है तो उस बल को गुरुत्व बल कहते हैं.17. काजग के टुकड़े कंघी की ओर खिंच जाते हैं. जब कंघी से बाल झाड़ते हो तब कंघी कागज के टुकड़ों को अपनी ओर खींचने लगती है. बल इस प्रकार लगता है इसे विद्दुत बल कहते हैं.18. कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं.19. देश के सभी राज्य में कोयले की आवश्यकताओं की पूर्ति झारखण्ड तथा पश्चिम बंगाल में अवस्थित कोयले के खानों से की जाती है. इन खानों में कोयला बहुत बड़ा भण्डार है20. ऊर्जा के अन्य स्रोत मेंa. पवनb. सूर्यc. गोबर तथा मल मूत्र21. पृथ्वी कई परत की बनी हुई है. इनमें से ऊपरी परत मिट्टी कहलाती है. इसी मिट्टी में पौधे उगते हैं. वास्तव में मिट्टी की ऊपरी सतह ही ऊपजाऊ होती है. जब यह किसी कारण से बर्बाद हो जाती है तब फसल उगाने की इसकी ताकत (उर्वरा शक्ति) घट जाती है.22. दो पहाड़ियों के बीच की निचली भूमि नदी घाटी कहलाती है.23. मिट्टी का एक जगह से बहकर दूसरी जगह चला जाना भूक्षरण कहलाता हैं.24. भूक्षरण को अपरदन भी कहते हैं. भूक्षरण की घटना समतल स्थानों की तुलना में ढालुआँ स्थानों पर ज्यादा होती है.25. वर्षा का पानी अपने साथ खेत की ऊपरी परत की मिट्टी बहाकर ले जाता है. जानते हो यह मिट्टी अंत में कहाँ पहुँच जाती है जहाँ इसकी परत – पर परत जमती चली जाती है, जानते हो इसे क्या कहते हैं? इसे तलछट कहते हैं.26. क्या पहाडियों की मिट्टी दहने लगती है? यदि हाँ तो यह मिट्टी दहकर कहाँ जमा होती है? वह नदी घाटी में जमा हो जाती है. इस तरह तुमने देखा की जल के साथ मिट्टी बहकर एक जगह से दूसरी जगह चली जाती है.27. मिट्टी का एक जगह से बहकर दूसरी जगह चला जाना भूक्षरण कहलाता है. भूक्षरण को अपरदन भी कहते हैं. भूक्षरण की घटना समतल स्थानों की तुलना में ढालुआँ स्थानों पर ज्यादा होती है.28. आपको मालूम होना चाहिए कि भूक्षरण में खेत की उपजाऊ मिट्टी ही बह या दह जाती है. इसी मिट्टी में ह्यूमस होता है. ह्यूमस मिट्टी में जरूरत लायक नमी बनाए रखता है. जानते हैं ह्यूमस कैसे बनता है/ पेड़-पौधों की पत्तियों एवं कीड़े-मकोड़ो के सड़ने-गलने से ही ह्यूमस बनता है.29. भूक्षरण द्वारा जब उपजाऊ मिट्टी बर्बाद हो जाती है तो इसकी रोकथाम करना भी आवश्यक है. भूक्षरण की रोकथाम को भूसंरक्षण कहते हैं.30. पंतनगर उत्तर प्रदेश के नैनीताल में एक स्थान है. यहाँ कृषि विश्वविद्यालय है. यह देश का पहला कृषि विश्वविद्यालय है. इसकी स्थापना 17 नवम्बर, 1960 ई. को हुई थी.31. फसल चक्र :- किसी खेत में एक ही किस्म की फसल लगातार लगाते रहने से उसमें कुछ खास किस्म के पोषक तत्वों की कमी हो जाती है. इससे खेत की उर्वरा शक्ति घाट जाती है. खेत को इस कमी से बचाने के लिए किसान उसमें फसलें अबल-बदल कर लगाता है. इसे फसल चक्र कहते हैं. उदहारण के लिए डॉ धान्य फसलों (धान, गेहूँ, मक्का आदि) के बीचएक दलहन फसल (अरहर, मूँग, मसूर, मूंगफली आदि) लगाना.32. ये सब संक्रामक बीमारियाँ हैं. अनेक ऐसी बीमारियाँ हैं जो विभिन्न तरीकों से एक मनुष्य से अन्य मनुष्यों में फैलती है.33. अधिकाँश संक्रामक बीमारियाँ जीवाणुओं से उत्पन्न होती हैं. जीवाणु अत्यंत सूक्ष्म होते हैं. ये सभी जगह तथा हर प्रकार की जलवायु में मिलते हैं. इन जीवाणुओं में से कुछ लाभप्रद हैं तथा कुछ हानिकारक. दही, पनीर, सिरका तथा एल्कोहाल बनाने वाले जीवाणु लाभदायक हैं. कुछ जीवाणु हैजा, निमोनिया आदि रोग पैदा करते हैं. कुछ से इन्फ्लुएंजा, चेचक, खासरा आदि रोग होते हैं. रोग फैलाने वाले सूक्ष्म जीवों को रोगाणु भी कहते हैं.34. टेटनेस रोग :- चोट लगने पर घाव के जरिये भी जीवाणु शरीर के भीतर प्रवेश कर जाते हैं. टेटनेस के जीवाणुओं से टेटनेस का रोग इसी प्रकार फैलता है.35. बहुत से रोग कीटों द्वारा होते हैं. मलेरिया, फाइलेरिया, कालाजार आदि कीटों द्वारा ही फैलते हैं.36. मलेरिया बीमारी मादा एनोफिलीज मच्छड़ के काटने से होता है.37. विटामिन सी की कमी से होने वाले रोग : मसूढ़े फूल जाते हैं और उनसे खून और मवाद आने लगते हैं. त्वचा के नीचे लाल-लाल चकत्ते निकल आते हैं. बचने के लिए विटामिन सी की कमी को पूरा करने के लिए अमरूद, संतरा, आंवला, अंकुरित, चना, नीबू आदि खाना चाहिए.38. विटामिन बी की कमी से होने रोग : - हाथ-पैर में चेतना की कमी मुँह के किनारे फटना आदि है. बचने के लिए अंकुरित दाल, साबुत अनाज, चना, हरी पत्तेदार शाक-सब्जी, दूध, जिगर आदि खाना चाहिए.39. विटामिन डी की कमी :- उचित वृद्धि नहीं होती, सुखा रोग हो जाता है और हड्डियाँ कमजोर हो जाती है. बचने के लिए खुले धूप में खेलना चाहिए.40. बीजों को सोने से की अवस्था से जगाने की अवस्था में लाने की क्रिया को अंकुरण कहते हैं.41. सेम का अंकुरित बीज लीजिए और उसे पिन के सहारे बीज का छिलका हटाओं. जानते हो इस छिलका को क्या कहते हैं? तो उसे बीजावरण कहते हैं.42. बीजावरण के नीचे दो सफ़ेद गुद्देदार बीजपत्र होते हैं तथा बीच में भ्रूण पाया जाता है. भ्रूण के दो भाग होते हैं – मूलांकुर तथा प्रांकुर से तना, पत्ति आदि बनते हैं. बीजपत्र भ्रूण का पोषण करता