उड़ीसा राज्य के प्रमुख लोक नृत्य
किसी भी राज्य या देश की सभ्यता संस्कृति वहाँ की पहचान होती है. उसी तरह से भारत जैसे महान देश के पास भी अपना सभ्यता संस्कृति है जिसमें अनेकता में एकता बातें देखने और समझने को मिलती है. भारत के अनेक राज्यों में उड़ीसा राज्य की भी अपनी सभ्यता और संस्कृति है, जिससे वहाँ की अपनी एक अलग पहचान बनती है. इसी तरह से उड़ीसा राज्य का अपना लोक नृत्य है जिनमें से प्रमुख लोक नृत्य इस प्रकार से है जैसे : छऊ, नाच, घमुरा, नृत्य और ढालखाई है. इनके अलावा राज्य के कुछ अन्य लोक नृत्य भी हैं. ये सभी लोक नृत्य राज्य संस्कृति और परंपराओं और विभिन्न समाजों को प्रदर्शित करते हैं.
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| उड़ीसा राज्य के प्रमुख लोक नृत्य |
1. घूमरा लोक नृत्य :यह लोक नृत्य उड़ीसा राज्य का सबसे प्रसिद्ध लोक नृत्य है. इस लोक नृत्य जन्म स्थान उड़ीसा राज्य के जिले कालाहांडी में हुआ है. घूमरा प्राचीन भारत का युद्ध लोक नृत्य की तरह दिखता है जिसे महाकाव्य रामायण में रावण के द्वारा किया गया था.
2. पाला लोक नृत्य :यह लोक नृत्य पूरे राज्य में किया जाता है, जो ‘सत्यपीर’ के पंथ से जुड़ा हुआ है. पाला लोक नृत्य के विषय में वहाँ के लोगों का कहना है कि इस लोक नृत्य मुस्लिम-शासन के समय में विकसित हुआ. पाला लोक नृत्य का प्रदर्शन मुख्य रूप से लोगों की के लिए ‘सत्यपीर के देवता’ को जगाने के लिए किया जाता है. यह लोक नृत्य समूह प्रदर्शन लोक नृत्य है. जिसमें पांच से छः व्यक्ति शामिल होते हैं. देखने के ख्याल से यह लोक नृत्य बहुत ही रोमांचक नाटक भी है.
3. दस्कथिया लोक नृत्य :यह लोक उड़ीसा राज्य के गंजम जिले मे उत्पन्न हुआ.
4. दल्खाई लोक नृत्य :
यह लोक नृत्य उड़ीसा राज्य के जिले संबलपुर की आदिवासी स्त्रियों के द्वारा किया जानेवाला यह लोक नृत्य एक प्रदर्शन नाच है. दशहरा का त्योहार दल्खाई प्रदर्शन का अवसर है. इस लोक नृत्य के गीत के लिए कोसली उड़िया भाषा का प्रयोग किया जाता है.
5. छाऊ लोक नृत्य :
यह लोक नृत्य उड़ीसा राज्य के मयूरभंज जिले एवं बालेश्वर जिले के नीलगिरी में भी उत्पत्ति और प्रदर्शन किया जाता है. इस लोक नृत्य की परंपरा में मार्शल आर्ट आधार है.
6. कर्म लोक नृत्य :
यह लोक नृत्य मुख्य रूप से उड़ीसा राज्य के लोक नृत्य देवता अथवा भाग्य की देवी की पूजा के समय किया जाता है. इस लोक नृत्य को भाद्र शुक्ल एकादशी से शुरू होता है और कई दिनों तक चलने वाला लोक नृत्य है. इस लोक नृत्य का विकास संबलपुर जिले में शुरू होता है. यह लोक नृत्य अधिकतर अनुसूचित जनजातियों समाज के लोगों के द्वारा बलांगीर, कालाहांडी, सुन्दरगढ़, संबलपुर और मयूरभंज जिले में किया जाता है.
7. बाघा लोक नृत्य :यह लोक नृत्य उड़ीसा राज्य में चैत्र माह के समय सुबरनपुर जिले के बिंका और सोनेपुर में किया जाता है. इस लोक नृत्य को मात्र पुरुषों के द्वारा किया जाता है.
8. कीसाबादी लोक नृत्य :यह लोक नृत्य संबलपूरी लोक नृत्य भी है. इस लोक नृत्य केवल पुरुष द्वारा ही किया जाता है. गाने का मुख्य विषय राधा और भगवान कृष्ण की प्रेम कहानी से लिया गया है.
9. ढप लोक नृत्य :यह लोक नृत्य अधिकतर कोसल क्षेत्र की कन्धा जनजाति के द्वारा किया जाता है. इस लोक नृत्य में पुरुष एवं महिला दोनों भाग लेते हैं. इस लोक नृत्य में एक गाँव के पुरुष दूसरे गाँव की महिलाओ के साथ नाच करता हैं. ज्यादातर अविवाहित लड़के एवं लड़कियां सम्मिलित होते हैं. यह लोक नृत्य मुख्य रूप से विवाह समारोह के समय और मनोरंजन को लेकर किया जाता है. इस लोक नृत्य का नाम संगीत वाद्यंत्र ढप से लिया गया है.
10. गोटी पुआ लोक नृत्य :
इस लोक नृत्य में लड़के और लड़कियाँ सम्मिलित होते हैं. वे अखाड़ों या जिमनास्टिक के छात्र होते हैं. इस लोक नृत्य को अखाड़ा पिल्स के रूप में जाना जाता है.
इन लोक नृत्यों के आलावा ओड़िसा में अन्य लोक नृत्य प्रचलित हैं :
बयाना लोक नृत्य, जादा लोक नृत्य, मैला लोक नृत्य, जयपुल लोक नृत्य, भिकानी लोक नृत्य, सजाना लोक नृत्य, दौलजीत लोक नृत्य, छोलाई लोक नृत्य, नचनी लोक नृत्य, हम्बौली लोक नृत्य, रसारकेली लोक नृत्य, छटा लोक नृत्य, दैका लोक नृत्य.
