20वीं शताब्दी के राष्ट्रीय आन्दोलन भाग 5 II GK II समान्य ज्ञान एक तथ्यात्मक अध्ययन

20वीं शताब्दी के राष्ट्रीय आन्दोलन

20वीं शताब्दी के राष्ट्रीय आन्दोलन II GK II समान्य ज्ञान एक तथ्यात्मक अध्ययन, general study
GK-General Knowledge


1.     गाँधी-इरविन समझौता 5 मार्च, 1931 को संपन्न हुआ.
2.     गाँधी जी के नेतृत्व में कांग्रेस सविनय अवज्ञा आन्दोलन स्थगित करने के लिए तैयार हो गई.
3.     सभी युद्ध बंदियों, जिनके विरुद्ध हिंसा का आरोप नहीं था, को रिहा करने का आदेश
4.     विदेशी कपड़ों और शराब की दुकानों पर शान्तिपूर्ण धरना देने का अधिकार 
5.     समुद्र तटीय प्रदेशों में बिना नमक कर दिए नमक बनाने की अनुमति 
6.     कांग्रेस द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए तैयार हो गई, परन्तु इस समझौते ने जनता को निराश किया क्योंकि भगत सिंह, सुखदेव एवं राजगुरु क फाँसी न दिए जाने की जनता की मांग को इसमें सम्मिलित नहीं किया गया था. 
7.     1939 त्रिपुरा संकट के बाद कांग्रेस की अध्यक्षता से त्यागपत्र के पश्चातसुभाष चन्द्र बोस ने ‘फारवर्ड ब्लॉक’ की स्थापना की. यह संगठन वामपंथी विचारधारा पर आधारित था. 
8.     चंपारण आन्दोलन – 1917 ई. 
9.     अहमदाबाद मजदूर आन्दोलन – फरवरी, 1918 ई. 
10.                        खेड़ा आन्दोलन – मार्च, 1918 ई. 
11.          रौलेक्ट एक्ट आन्दोलन – 1919 ई. 
12.         चंपारण आन्दोलन बिहार के किसानों के नील की खेती से संबंधित था. 
13.     आहादबाद आन्दोलन के मिल मजदूरों के प्लेग बोनस के विवाद से संबंधित था. 
14.                        खेड़ा आन्दोलन खेड़ा जिले में फसल नष्ट होने के बावजूद किसानों से लगान वसूली से संबंधित था. 
15.                        20 फरवरी, 1947 को इटली ने हाउस ऑफ़ कामंस के समक्ष बयान दिया कि जून, 1948 तक अंग्रेज भारत छोड़ देंगे. इसी परिप्रेक्ष्य में 22 मार्च, 1947 को माउंटबेटन भारत आए और 3 जून, 1947 को माउन्टबेटन योजना प्रस्ताव की गई. 
16.                        मांउटबेटन द्वारा तैयार की गई भारत विभाजन की योजना को ‘माउन्टबेटन योजना’ के नाम से जाना जाता है. 
17.                        ब्रिटिश संसद द्वारा 18जुलाई, 1947 को ‘भारतीय अधिनियम’ पारित किया गया. 
18.                        इसी के तहत 15 अगस्त, 1947 को भारत को स्वतंत्रता पदान कर दी गई. 
 19.                        गाँधी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन प्रारंभ करने से पहले वासराय इरविन के समक्ष 11 मांगे रखी थीं,उसमें नमक कर एवं नमक पर सरकारी एकाधिकार की समाप्ति की मांग की गई थी. इसी उद्देश्य को लेकर 12 मार्च, 1930 को गांधी जी ने अपने 78 साधियों के साथ दांडी मार्च शुरू किया. 6 अप्रैल, 1930 को महात्मा गाँधी ने दांडी में एक मुठ्ठी नमक हाथ में लेकर सविनय अवज्ञा आन्दोलन का श्रीगणेश किया. 
20.                        आचार्च विनोबा भावे को पहली बार सविनय अवज्ञा आन्दोलन में भाग लेने के कारण गिरफ्तार किया गया. 
21.                        अमेरिकी पत्रकार बेब मिलर को गाँधी जी ने दांडी मार्च के समय अपने साबरमती आश्रम में ठहराया था. 
22.                        गाँधी द्वारा चंपारण सत्याग्रह का सफल नेतृत्व करने के कारण रबिन्द्रनाथ टैगोर ने पहली बार उन्हें ‘महात्मा’ कहा. 
23.                        चौरी-चौरा काण्ड – 5 फरवरी, 1922 
24.                        मोपला विद्रोह – 1921 ई. 
25.                        चटगाँव शस्त्रागार लूट – 18 अप्रैल, 1930 
26.                        5 फरवरी, 1922 को हुए चौरी-चौरा कांड के कारण महात्मा गाँधी ने असहयोग वापस ले लिया. 
27.                        मोपला विद्रोह मालाबार तट पर केरल में मोपला किसानों द्वारा किया गया. 
28.                        चटगाँव शास्त्रागार लुट के मुख्य सूत्रधार सूर्यसेन थे जो ‘मास्टर दा’ के नाम से प्रसिद्ध थे.
29.                        4 जुलाई, 1943 को रास बिहारी बोस ने आजाद हिन्द फ़ौज की कमान सुभाष चन्द्र बोस को सौंपा दी. 
30.                        21 अक्टूबर, 1943 को सुभाष चन्द्र बोस ने सिंगापुर में स्वतंत्र भारत क अस्थायी सरकार (आजाद हिन्द सरकार) का गठन किया. 
31.                        महात्मा गाँधी को सर्वप्रथम ‘राष्ट्रपिता’ सुभाष चन्द्र बोस ने कहा था.

32.                        सुभाष चन्द्र बोस ने 1939 ई. में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और फारवर्ड ब्लाक का गठन किया. 
33.                        26 जनवरी, 1941 ई. को पठान जियाउद्दीन के वेश में थे ये घर से बाहर निकल गए और 21 जनवरी, 1941 को काबुल पहुँच गए. 
34.                        सुभाष चन्द्र बोस ने सिंगापुर में ‘दिल्ली चलो’ और ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ का नारा दिया. 
35.                        पश्चिमी सीमा प्रान्त में खान अब्दुल गफ्फार खां के नेतृत्व में ‘खुदाई खिदमतगार’ नामक स्वयंसेवक संगठन स्थापित किया गया था,इन्हें ‘लाल कुर्ती’ के नाम से भी जाना जाता है. ‘लाल कुर्ती’ संगठन ने पठानों की राष्ट्रीय एकता का नारा बलंद किया और अंग्रेजों से स्वतंत्रता के लिए ब्रिटिश उपनिवेशवाद के विरुद्ध आन्दोलन संगठित किया और श्रमजीवियों की हालत में सुधार की मांग की. ध्यातव्य है कि जब अन्य प्रान्तों में मुसलमान स्वयं को सत्याग्रहआन्दोलन से अलग रख रहे थे, उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रान्त के मुसलमानो ने खान अब्दुल गफ्फार के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आन्दोलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. 
36.                        स्वदेशी आन्दोलन – 1905 इ. 
37.                        जालियावाला बाग़ हत्याकांड – 13 अप्रैल, 1919 
38.                        डांडी यात्रा – 12 मार्च, 1930 
39.                        भारत छोड़ो आन्दोलन – अगस्त, 1942 
40.                        चौरी-चौरा कांड – 5 फरवरी, 1922 
41.                        रौलेक्ट एक्ट – 18 मार्च, 1919 
42.                        असहयोग आन्दोलन का प्रारंभ – 1 अगस्त, 1920 
43.                        रौलेक्ट सत्याग्रह – 6 अप्रैल, 1919 
44.                        असहयोग आन्दोलन का स्थगन  – 1922 ई.
45.                        चार प्रमुख कांग्रेसी नेताओं लाला, लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, विपिन चन्द्र पाल (ये तीन क्रमशः लाल, बाल, पाल के रूप में प्रसिद्ध हैं) और अरविन्द घोष ने कांग्रेस के भीतर उग्रवादी दल का नेतृत्व किया. 1906 ई. के बाद भारतीय राजनीती में कांग्रेस के भीतर उग्रवादी दल के उदय के साथ-साथ देश में क्रन्तिकारी उग्रवादी दलों का आविर्भाव हुआ. इन नेताओं ने स्वराज प्राप्ति को ही अपना प्रमुख लक्ष्य एवं उद्देश्य बनाया. 
46.                        तिलक ने नारा दिया कि ‘स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा.’ 
47.                        16 अक्टूबर, 1905 को बंगाल को पूर्वी बंगाल एवं पश्चिमी बंगाल में विभाजित कर दिया गया. 
48.                        पश्चिम बंगाल में बिहार, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल शामिल था. 
49.                        1936 में बिहार को उड़ीसा से अलग कर के दो पृथक-पृथक प्रान्त बना दिया गया. 
50.                        7 अगस्त, 1942 को बंबई के ऐतिहासिक ग्वालिया टैंक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की वार्षिकी बैठक हुई जिसमें वर्धा प्रस्ताव (भारत छोड़ो) की पुष्टि हुई. इसी में गाँधी ने अपना प्रसिद्ध नारा करो या मरो’ दिया था. 
51.                        यह अधिवेशन अबुल कालाम आजाद की अध्यक्षता में हुआ था. 
52.                        1896-97 ई. में बाल गंगाधर तिलक ने संपूर्ण महाराष्ट्र में ‘कर न देने का आन्दोलन’ चलाया. इसी दौरान जनता ने इन्हें ‘लोकमान्य’ की उपाधि दी.  
53.                        1897 ई. में तिलक ने अपने पत्र केसरी में रैंड एवं एयर्स्ट की हत्या को उचित ठहराने के कारण इन पर राजद्रोह का आरोप लगाकर 18 माह की सजा दी गई.  
54.                        24 जून, 1908 को तिलक को फिर गिरफ्तार किया गया और केसरी में प्रकाशित लेखों के आधार पर राजद्रोह का मुकदमा चलाकर इन्हें 6 वर्ष की सजा दी गई.   
55. तिलक को मांडले जेल (बर्मा) में रखा गया जहाँ इन्होंने अपनी पुस्तक गीता रहस्य लिखी
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