20वीं शताब्दी के राष्ट्रीय आन्दोलन part 6
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राष्ट्रीय आन्दोलन |
· डॉ. भीमराव अम्बेडकर (बी. आर. आंबेडकर) तीनों गोलमेज सम्मेलनों में भाग लेने वाले भारतीय प्रतिनिधि थे.
· 1928 में कृषक आन्दोलन का नेतृत्व सरदार पटेल ने किया. इसी आन्दोलन में सफलता के कारण पटेल को बारदोली की महिलाओं ने ‘सरदार’ की उपाधि प्रदान की.
· भारतीय किसान विद्यालय की स्थापना एन. जी. रंगा ने की थी.
· 1937 में हुए चुनावों के बाद इन्होंने बंगाल में मुस्लिम लीग के साथ मिलकर सरकार बनाई. बिहार का बाकाश्त (स्वयं खेती की भूमि) संघर्ष स्वांमी श्रद्धानन्द सरस्वती से संबंधित है.
· भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन का तीसरा चरण (1919-47 ई.) गाँधी युग के नाम से जाना जाता है. जवनरी, 1915 ई. में गंधी जी भारत आए. उन्होंने गोपाल कृष्ण गोखले को अपना राजनितिक गुरु बनाया. इनके प्रभाव में आकर गाँधी ने भारत की सक्रिय राजनीती से अपने को जोड़ा.
· 8 अगस्त, 1942 को अखिल भारतीय कांग्रेसकमेटी की बैठक में पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा ‘भारत छोड़ प्रस्ताव’ पेश किया गया था जिसका सरदार वल्लभभाई पटेल ने समर्थन किया था. ‘भारत छोड़ो’ प्रस्ताव का आलेख स्वयँ महात्मा गाँधी ने नेहरू और आजाद के सहयोग से बनाया था.
· चितरंजन दास को ‘देशबंधु’ के नाम से जाना जाता था. देशबन्धु का तात्पर्य है – The Friends of Nations. चितरंजन दास इंगलैण्ड से वकालत की पढाई करने के बाद स्वदेश आकर बैरिस्टर हो गए और वकील के रूप में इनकी सबसे बड़ी सफलता अलीपुर बम काण्ड केस में अरविन्द घोष का बचाव करना था. उन्होंने मोतीलाल नेहरू के साथ मिलकर ‘स्वराज पार्टी’ की स्थपना की थी.
· गाँधी जी जनवरी, 1915 ई. में दक्षिण अफ्रीका के भारत आए. उससमय ब्रिटिश सरकार प्रथम विश्व युद्ध (194-18) में फंसी थी. गाँधी ने लोगों को सेना में भर्ती होने के लिए प्रोत्साहित किया. गाँधी जी का भारत में सत्याग्रह का पहला बड़ा प्रयोग 1917 ई. में चंपारण जिले में किया. इसके बाद गाँधी ने विभिन्न आंदोलनों के माध्यम से भारतीय राजनीती में छा गए और आम जनता को राष्ट्रवाद की ओर मोड़ दिया.
· 20 जुलाई, 1905 को बंगाल के गर्वनर लार्ड कर्जन द्वारा बंगाल विभाजन का निर्णय लिया गया और 16 अक्टूबर, 1905 विभाजन प्रभावी हो गया. 7 अगस्त, 1905 ई. को कलकत्ता के टाउन हाल में स्वदेशी आन्दोलन की मुख्य भूमिका बंगाल के छात्रों की रही.
· स्वदेशी आन्दोलन का सबसे अधिक प्रभाव सांस्कृतिक क्षेत्र पर पड़ा.
· इस आन्दोलन की एक महत्वपूर्ण विशेषता थी कि महिलाओं ने इसमें सक्रिय रूप से भाग लिया.
· यह आन्दोलन बंगाल के किसानो को प्रभावित नहीं कर सका.
· यह आन्दोलन शहरों के उच्च एवं माध्यम वर्ग तक ही सीमित रहा.
· चंपारण सत्याग्रह गांधीजी क पहला बड़ा प्रयोग था. 1917 ई. में बिहार के चंपारण जिले में ‘तीनकठिया पद्धति के विरोध में गाँधी जी द्वारा सत्याग्रह किया गया.
· यहाँ के किसानों को अपनी जमीन के कम से कम 3/20 भाग पर नील की खेती करना और यूरोपीय मालिकों द्वारा तय दामों पर उन्हें बेचना पड़ता था.
· 1917 ई. में राजकुमार शुक्ल ने गांधीजी से चंपारण आने का आग्रह किया.
· चंपारण में गाँधी के सहयोगी राजेन्द्र प्रसाद, जे.बी. कृपलानी, महदेव देसाई, मजहरुल हक, नरहरी पारिख और वृज किशोर थे.
· गांधी जी का यह आन्दोलन सफल रहा. यरोपीय निलहे किसानों की 25% राशि वापस करने के लिए राजी हो गए और गाँधी जी ने इसे स्वीकार कर लिया.
· क्रिप्स मिशन – 1942 ई.
· गाँधी-जिन्ना वार्ता – 944 ई.
· शिमला कांफेरेंस – 1945 ई.
· कैबिनेट मिशन – 1946 ई.
· शाही नौ सेना का विद्रोह – 18 फरवरी, 1946
· संविधान सभा का चुनाव – जुलाई, 1946
· सीधी कार्यवाह दिवस – 16 अगस्त, 1946
· माउंट बेटेन योजना – 3 जून 1947
· 26 अक्टूबर, 1946 ई. को मुस्लिम लीग के 5 सदस्यों जिसमें लियाकत अली सम्मिलित थे, अंतरिम सरकार में शामिल हो गए. इस अतंरिम सरकार में लियाकत अली वित्त मंत्री बनाए गए.
· नेहरु को उपाध्यक्ष (उप राष्ट्रपति) बनाया गया था.
· पटेल को गृह मंत्री बनाया गाया.
· सरदार बलदेव सिंह – रक्षा मंत्री.
· राजेन्द्र प्रसाद को खाद्द एवं कृषि मंत्री
· अरुणा आसफ अली – रेवले मंत्री
· राजगोपालाचारी को शिक्षा मंत्री.
