20वीं शताब्दी के राष्ट्रीय आन्दोलन part 1 II सामान्य अध्ययन GK


20वीं शताब्दी के राष्ट्रीय आन्दोलन part 1

1.    कर्जन ने 20 जुलाई, 1905 को बंगाल विभाजन का निर्णय की घोषणा की और यह 16 अक्टूबर, 1905 से विभाजित प्रभावी हो गया. 
2.    बंगाल विभाजन के दिन पूरे बंगाल में ‘शोक दिवस’ के रूप में मनाया गया. 
3.    रविन्द्रनाथ टैगोर के सुझाव पर विभाजन के दिन संपूर्ण बंगाल में ‘राखी दिवस’ के रूप में मनाया गया. 
4.    लार्ड हार्डिंग द्वितीय के समय 1911 ई. में विभाजन रद्द कर दिया गया. 
5.    असहयोग आन्दोलन की असफलता के बाद स्वराज पार्टी (कांग्रेस-खिलाफत स्वराज पार्टी) का गठन मार्च, 1932 में सी. आर. दास और मोतीलाल नेहरु ने किया. सी. आर. दास इसके अध्यक्ष तथा मोतीलाल नेहरु इसके महासचिव थे. स्वराज पार्टी ने अपने को कांग्रेस के अभिन्न हिस्से के रूप में प्रचारित किया. साथ ही अहिंसा और असहोयोग के प्रति अपनी वचनबद्धता को दोहराया.  
6.    भारत में ट्रेड यूनियन कांग्रेस (अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस) की स्थापना एन. एम. जोशी द्वारा 31 अक्टूबर, 1920 ई. को बंबई में की गई. इसकी स्थापना का कारण 1919 ई. में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की स्थापना था. इसलिए भारतीय श्रमिक संगठनों ने आपस में संगठित होने का फैसला किया. इसके प्रथम अध्यक्ष लाला लाजपत राय थे और उपाध्यक्ष जोसेफ बैपटिस्टा एवं महामंत्री दीवान चमनलाल बाजाज थे. इस संगठन का प्रथम विभाजन 1929 ई. में नागपुर अधिवेशन में हुआ. इस समय जवाहरलाल इसके अध्यक्ष थे. 
7.    सेंट जेम्स पैलेस (लन्दन) में द्वितीय गोलमेज सम्मेलन 7 सितम्बर, 1931 से 1 दिसंबर, 1931 तक चला. इस सम्मेलन में महात्मा गाँधी ने एक मात्र कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में हिस्सा लिया. इनके अलावा सरोजनी नायडू और मदन मोहन मालवीय ने भी इस सम्मेलन में हिस्सा लिया. 
8.    गाँधी जी ‘एस. एस. राजपुताना’ नामक जलपोत से लन्दन पहुँचे और वे लन्दन और वे लन्दन के ‘किंग्सले हाल’ में ठहरे थे. 
9.    एनी बेसेंट ने भी इस सम्मेलन में भाग लिया था. 
10.                      प्रथम गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड ने की थी. 
11.            रायल इंडियन नेवी के विद्रोह की शुरुआत 18 फरवरी, 1946 को हुई, जब बंबई में ‘एच.एम. एस. तलवार’ के 1100 नाविकों ने नस्लवादी भेदभाव और खराब भोजन के प्रतिवाद में हड़ताल कर दिया. 19फरवरी को कराची के नाविकों ने भी हड़ताल कर दी. 
12.                      नौ सेना विद्रोह के समय ‘ब्रिटिश साम्राज्य मुर्दाबाद’, ‘जय हिन्द’, ‘इंकबाल जिंदाबाद’, हिन्दू-मुस्लिम एक हो’ आदि नारे लगाए गए. 
13.                      24 फरवरी, 1946 क आत्मसमर्पण करते हुए विद्रोहियों ने कहा कि ‘हम भारत के सामने समर्पण कर रहे हैं, ब्रिटेन के सामने नहीं’. 
14.                      इस विद्रोह के समर्थन में 22 फरवरी को बंबई में लगभग 20 लाख मजदूरों ने हड़ताल में हिस्सा लिया. 
15.                      लाहौर षड्यंत्र केस के अंतगर्त गिरफ्तार जतिन दास ने जेल में राजनितिक बंदी का दर्जा प्राप्त करने के लिए भूख हड़ताल की. 64 दिन की भूख हड़ताल के बाद सितंबर, 1929 में उनकी मृत्यु हो गई. इस प्रकार इनकी मृत्यु भूख हड़ताल से हुई, न कि भगत सिंह के साथ फांसी देने से हुई. 
16.                      भगत सिंह, राजगुरु (पूरा नाम-शिराम हरि राजगुरु) और सुखदेव (पूरा नाम-सुखदेव थापर) को 23 मार्च, 1931 को फांसी दे दी गई. 
17.                      बटुकेश्वर दत्त को कालापानी की सजा देखर सेलुलर जेल (अंडमान) भेजा गया. 
18.                      सूर्य सेन को 12 जनवरी, 1934 को फांसी दी गई. 
19.                      कपिलराज सम्मेलन का संबंध बारदोली सत्याग्रह (1928 ई.) से है. 
20.                      बारदोली की औरतों ने पटेल को ‘सरदार’ की उपाधि से विभूषित किया. 
21.                      बारदोली में लगान वृद्धि 22.7% से घटाकर 6.03%कर दी गई. 
22.                      बारदोली सत्याग्रह में सक्रिय महिलाओं में कस्तूरबा गाँधी, मनी बेन पटेल) (वल्लभ भाई पटेल की पुत्री) भक्तिबा (दरबार गोपाल दास की पत्नी), शारदा बेन शाह और शारदा मेहता प्रमुख थी. 
23.                      द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भारतीय राष्ट्रीय कांगेस के पतिनिधि ने प्रथम बार भाग लिया था. यह सम्मेलन लन्दन में 7 सितम्बर, 1931 से 1 दिसंबर, 1931 तक चला. इसमें कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में गांधीजी ने हिस्सा लिया. किन्तु गतिरोधों के कारण सम्मेलन 1 दिसंबर को समाप्त घोषित कर दिया गया एवं गांधीजी को लन्दन से खाली हाथ वापस आना पड़ा स्वदेश पहुँचने पर गाँधी जी ने कहा, ‘यह सच है कि मैं खाली हाथ लौटा हूँ किन्तु मुझे संतोष है कि जो ध्वज मुझे सौंपा गया था. उसे नीचे नहीं होने दिया और उसके सम्मान के साथ समझौता नहीं दिया.’ 
24.                      लखनऊ समझौता – 1916 ई. 
25.                      चम्पारण सत्याग्रह – 1917 
26.                      असहयोग आन्दोलन – 1920 
27.                      सविनय अवज्ञा आन्दोलन – 1930

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