भारत पर मुस्लिम आक्रमण II General Study II एक तथ्यात्मक जानकारी जो परीक्षा उपयोगी


भारत पर मुस्लिम आक्रमण

 1.            हिन्दूशाही राजा राज्यपाल महमूद गजनवी के साथ युद्ध में अपने निरंतर पराजय से इतना अपमानित महसूस किया कि अंत में आत्महत्या कर लिया. हिन्दूशाही वंश की राजधानी वैहिंद या उद्भांडपुर थी. 
 2.            महमूद ने सुखपाल (नौराशाह धर्म परिवर्तन के बाद नाम) को मुल्तान का शासक नियुक्त किया. सुखपाल, अनन्दपाल का पुत्र था. 
 3.            कन्नौज आक्रमण (1080 ई.) के दौरान ही महमूद ने सर्वप्रथम बरन (बुलन्द शहर) महावन, मथुरा और वृन्दावन पर आक्रमण किया और अंत में कन्नौज पर आक्रमण किया. 
 4.            फिरदौसी महमूद के दरबार का विद्वान कवि था. इसे ‘पूर्व का होमर’ की उपाधि दी गई थी. 
 5.            तराइन के द्वितीय युद्ध के पश्चात्य तुर्की शासन के अंतर्गत जो क्षेत्र हस्तांतरित हो गया, वह दिल्ली और पूर्वी राजस्थान था. इस युद्ध के पश्चात्य गोरी ने दिल्ली को भी जीत लिया. 
 6.            हसन निजामी में मत के अनुसार पृथ्वीराज, गोरी के साथ अजमेर गया और उसने गोरी की अधीनता स्वीकार कर ली थी. परन्तु उसने विद्रोह करने का प्रयास किया तो उसे मृत्युदंड दे दिया गया. 
 7.            फारुद्दीन राजी और नजामी उरुजी उसके दरबार से संबंध थे.  
 8.            हेनरी इलियट के अनुसार महमूद गजनवी ने 1000 से 1027 ई. के बीच भारत पर 17 बार आक्रमण किया. अधिकांश विद्वान हेनरी इलियट के इस मत का समर्थन करते हैं.  
 9.            महमूद गजनवी की सेना में अरब, तुर्क, अफसान और हिन्दू सैनिक शामिल थे. 
10.            जाटों और खोक्खरों को दण्ड देने के लिए महमूद गजनवी ने 1027 ई. में भारत पर अंतिम आक्रमण किया. 
11.            अलबरूनी ने लिखा है कि ‘हिन्दू यह नहीं चाहते थे कि जो वस्तु एक बार अपवित्र हो जाए, उसे शुद्ध करके पुन: अपना बना लिया जाए.’ 
12.            1192 ई. में तराइन के द्वितीय युद्ध में मोहम्मद गोरी द्वारा पृथ्वीराज चौहान की पराजय के बाद भारत में मुस्लिम शक्ति की स्थापना हुई. गोरी की सजनता और श्रेष्ठ युद्ध प्रणाली के कारण मुसलमानों की जीत हुई. पृथ्वीराज चौहान ने हताश होकर घोड़े पर बैठकर भागने का प्रयत्न किया किन्तु सुरसती (आधुनिक सिरसा, हरियाणा राज्य में) के निकट इसे बंदी बना लिया गया. पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु के बारे में विभिन्न मत प्रकट किए गए हैं किन्तु उनमें हसन निजामी का मत ही स्वीकार किया जाता है. उनके अनुसार पृथ्वीराज चौहान गोरी के साथ अजमेर गया था और उसने गोरी की अधीनता स्वीकार कर ली थी. परन्तु जब उसने विद्रोह करने का षड्यंत्र किया तो उसे मृत्युदंड दे दिया गया. 
13.            महमूद गजनवी ने भारत परअपने दूसरे आक्रमण 1001 ई. के समय हिन्दूशाही राजा जयपाल को मुक्त कर दिया. 
14.            महमूद के आक्रमणों का उद्देश्य भारत में स्थाई मुस्लिम शासन की स्थापना करना नहीं था, बल्कि मात्र लूटपाट करना था.
15.            बगदाद के खलीफा अल-कादिर बिल्लाह ने हिरात बल्ख, बस्त और खुरासान के प्रदेशों पर महमूद गजनवी के अधिकार को स्वीकार कर उसे ‘यमीन-उद-दौला’ (साम्राज्य का दाहिना हाथ) और ‘अमीन-उल-मिल्लत’ (धर्म का रक्षक) की उपाधियों सेविभूषित किया. 
16.            सिंध पर अरबों के अरबों के कब्जे के बाद मुहम्मद बिन कासिम द्वारा लगाया गया भूमि कर ‘खराज’ कहलाता था. 
17.            सिंध विजय के बाद सर्वप्रथम जजिया कर लगाने वाला शासक मुहम्मद बिन कासिम था. 
18.            अरबों को मुल्तान से अधिक स्वर्ण प्राप्त होने के कारण उसने मुल्तान को ‘स्वर्ण नगरी’ के नाम से पुकारा. 
19.            भोज के ग्वालियर प्रशस्ति में नागभट्ट प्रथम को म्लेच्छों अथवा अरबों को परास्त करने का श्रेय दिया जाता है. 
20.            नालंदा विश्वविद्यालय प्राचीन भारत के शिक्षा केन्द्रों में सर्वाधिक उल्लेखनीय है. सर्वप्रथम यहाँ एक बौद्ध विहार की स्थापना गुप्त काल में करवाई गई. चीनी यात्री ह्वेनसांग के अनुसार इसका संस्थापक ‘शक्रादित्य’ (कुमारगुप्त) था. हर्ष काल में नालन्दा को पूर्ण राजकीय संरक्षण मिला जिसके परिणामस्वरूप यह जगत प्रसिद्ध विश्वविद्यालय बन गया. हर्ष ने लगभग 100 ग्रामों की आय इसके निर्वाह के लिए दिया. ग्यारहवीं शती से पाल शासकों ने नालंदा के स्थान पर विक्रमशिला को राजकीय संरक्षण देना प्रारंभ कर दिया जिससे नालन्दा का महत्त्व घटने लगा. 
21.            जावा एव सुमात्रा के शासक बालपुत्रदेव ने नालंदा में एक मठ बनवाया और उसके निर्वाह के लिए पाल शासक देवपाल से पाँच गाँव दान में दिलवाया. 
22.            नालंदा महायान बौध धर्म की शिक्षा का केन्द्र था. 
23.            ह्वेसांग के समय शीलभद्र नालन्दा विश्वविद्यायल के कुलपति थे. 
24.            इत्सिंग ने नालन्दा में रहकर 400 संस्कृत ग्रंथों की प्रतिलिपियाँ तैयार की थी. 
25.            महमूद गजनवी शिक्षित एवं सुसभ्य था. वह विद्वानों एवं कलाकारों का सम्मान करता था. उसने अपने समय के महान विद्वानों को गजनी में एकत्रित किया था. उसका दरबारी इतिहासकार उत्बी था. उसने ‘किताब-उल-यामिनी’ या ‘तारीख-ए-यामिनी’ नामक ग्रंथों की रचना की. इसके अतिरक्त उसके दरबार में दर्शन, ज्योतिष और संस्कृत का उच्चकोटि का विद्वान अलबरूनी, ‘तारीख-ए-सुबुक्तगीन’ का लेखक बैहाकी’ जिसे इतिहासकार लेनपूल ने पूर्वी पेप्स की उपाधि दी थी, फारस का कवि उजारी, खुरासानी विद्वन तुसी एवं उन्सुरी, विद्वान अस्जदी और फार्रुखी और ‘शाहनामा’ के रचयिता फिरदौसी प्रमुख व्यक्ति थे. 
26.         फिरदौसी को ‘फारसी का होमर’ कहा गया है. यह मध्यकाल का महत्वपूर्ण विद्वान था. यह महमूद गजनवी के दरबार में था. इसने अनेक ग्रंथों की रचना की जिनमें शाहनामा प्रमुख है, जो आज भी बड़ा लोकप्रिय है. महमूद गजनवी ने फिरदौसी को उकसी पारिश्रमिक की राशि भी नहीं दी थी, जिसने उसे बड़ा आघात पहुंचा. फिरदौसी की शैली और अभिव्यक्ति बड़ी सुन्दर है. 
27.            महमूद गजनवी के दरबार में उत्बी, अलबरूनी और वैहाकी अन्य महत्वपूर्ण इतिहासकार थे. 
28.            उत्बी ने किताबुल यामिनीया तारीखे यामिनी नामक ग्रन्थ की रचना की. 
29.            वैहाकी की प्रमुख रचना तारीख-ए-सुबुक्तगीन थी. 
30.        महमूद गजनवी ने मुल्तान के शासक अब्दुल फतह दाउद के विरुद्ध अपना चौथा आक्रमण 1006 ई. में किया, थानेश्वर पर 1012-13 ई. में, कश्मीर पर 1014 ई. में मथुरा पर 1016 में तथा कन्नौज पर 1018 ई. में आक्रमण किया. अत: महमूद गजनवी का भारत पर आक्रमण का क्रम इस प्रकार है – मुल्तान, थानेश्वर, कश्मीर, मथुरा, कन्नौज. 
31.         महमूद का भारत पर आक्रमण का प्रमुख उद्देश्य की संपत्ति को लूटना था. 
32.          इतिहासकारों ने महमूद गजनवी को प्रथम सुल्तान माना है. यद्दपि उसके सिक्कों पर सिर्फ ‘अमीर महमूद’ अंकित किया गया था. 
33.     महमूद गजनवी ने यामीन-उद-दौला और अमीन-उल-मिल्लित की उपाधि धारण की. 
34.            1194 ई. में चंदावर के युद्ध में मुहम्मद गोरी ने कन्नौज के गहड़वाल राजा जयचंद को पराजित किया थ. चन्दावर’ वर्तमान फिरोजबाद जिले में यमुना तट पर स्थित है. 
35.      अलप्तगीन का पुत्र सुबुक्तगीन प्रथम तुर्की शासक था जिसने भारत पर आक्रमण किया. उसने हिन्दूशाही शासक जयपाल के राज्य पर आक्रमण किया और उसे पराजित किया. 
36.      यामिनी वंश का संस्थापक अलप्तगीन था उसने गजनी को अपनी राजधानी बनाया. 
37.      सुबुक्तगीन की विजयों से उत्साहित होकर महमूद गजनवी ने 1000 ई. से 1027 ई. तक भारत पर 17 बार आक्रमण किया.  
38.     महमूद गजनवी के आक्रमणों का उल्लेख प्रसीद्ध विद्वान हेनरी इलिएट ने किया है. 
39.            1008-09 ई. में महमूद गजनवी ने हिन्दूशाही राज्य पर आक्रमण किया इस समय पंजाब में अनंदपाल शासक था. आनंदपाल ने एक संघ बनाया जिसमें दिल्ली,अजमेर, ग्वालियर, कन्नौज और कालिंजर से सैनिक सहायता मिली. वैह्न्द के पास झेलम नदी के तट पर आनन्दपाल और महमूद गजनवी के बीच यूद्ध हुआ जिसमें आनन्दपाल पारजित हो गया और भाग गया. 
40.            आनन्दपाल भाग कर नगरकोट के किले में शरण ली, लेकिन तीन दिन के युद्ध के बाद उसे वहाँ से भी भागना पड़ा. 
41.            आनन्द पाल ने शत्रुओं का प्रतिरोध करने के लिए नमक की पहाड़ियों के छोर पर स्थित नन्दन को अपनी राजधानी बनाया. 
42.            आनन्दपाल ने शत्रुओं का प्रतिरोध करने के लिए नमक की पहाडियों के छोर पर स्थित नन्दन को अपनी राजधानी बनाया. 
43.            इसकी शांतिपूर्ण ,मृत्यु के पश्चात्य उसका पुत्र त्रिलोचनपाल गद्दी पर बैठा. 
44.            भारत में फारसी भाषा का विकास तुर्क मिस्लिम विजेताओं के आगमन से प्रारंभ हुआ. यहाँ इसको एक नवीन रूप प्रदान किया गया. यह प्रारंभ में शासक वर्ग और अमीर वर्ग की भाषा थी और इसको उन्हीं का संरक्षण भी प्राप्त था. 
45.            दिल्ली सल्तनत की स्थापना के पश्चात्य फारसी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया. 
46.            हसन निजामी जो कुतुबुद्दीन ऐबक के शासनकाल में दिल्ली आया था फारसी भाषा में ‘ताज-उल-मसिर’ की रचना की थी. 
47.            खुसरो फारसी का सर्वप्रथम कवि था जिसने अपने फारसी रचनाओं को भारतीय पर्यावरण में ढालने का सफल प्रयास किया. खुसरों ने हिन्दवी और फारसी दोनों भाषाओँ में रचनाएँ कीं. 
48.            पुराणों का अध्ययन करने वाला प्रथम मुलसमान अलबुरूनी था. उसका जन्म 973 ई. में हुआ था. वह खीवा (प्राचीन ख्वारिज्म) के देश का रहने वाला था. वह महमूद गजनवी के साथ भारत आया था. अलबरूनी मात्र इतिहासकार नहीं था, उसके ज्ञान और रुचियों की व्याप्ति जीवन के अन्य क्षेत्रों तक थी, जैसे – खगोल-विज्ञान, भूगोल, तर्कशास्त्र, औषधि विज्ञान, गणित और धर्म और धर्मशास्त्र. इन्हीं रुचियों ने उसे भारत की तत्कालीन धार्मिक-सांस्कृतिक स्थिति के बारे में ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया. उसने संस्कृत का अध्ययन किया और अनेक संस्कृत रचनाओं का उपयोग किया जिसमें ब्रह्मगुप्त, बलभद्र और वाराहमिहिर की रचनाएँ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं. उसने जगह-जगह भगवद्गीता, विष्णु पुराण और वायु पुराण के तथ्यों को उद्धृत किया है. अलबरूनी ने अरबी भाषा में ‘तहकीक-ए-हिन्द’ की रचना की थी. सर्वप्रथम सचाऊ ने अरबी भाषा से इस ग्रन्थ का अनुवाद अंग्रेजी भाषा में किया. इसका अनुवाद हिन्दी में’रजनीकान्त शर्मा’ द्वारा किया गया. 
49.   मुहम्मद गोरी द्वारा परास्त किया गया प्रथम भारतीय शासक पृथ्वीराज चौहान था. 1192 ई. में तराइन का द्वितीय युद्ध मुहम्मद गोरी और पृथ्वीराज तृतीय की सेनाओं के मध्य लड़ा गया. इस युद्ध में पृथ्वीराज चौहान पराजित हुआ. भारत में तुर्की राज्य की स्थापना का मार्ग तराईन के द्वितीय युद्ध में विजय के बाद प्रशस्त हुआ. 
50.    1178 ई. में गुजरात के शासक भी द्वितीय ने मुहम्मद गोरी को पराजित किया था. 
51.     1191 ई. में तराइन के प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज चौहान ने मुहम्मद गोरी को पराजित किया था. मुहम्मद गोरी का प्रथम आक्रमण 1175 ई. में मुल्तान पर हुआ था. 
52.           महमूद गजनवी को परास्त करने हेतु राजपूत शासकों को संघ का नेतृत्व जयपाल के पुत्र और हिन्दूशाही वंश के शासक आनन्दपाल ने किया था. 1009 ई. में दिल्ली, अजमेर, ग्वालियर, कन्नौज और कालिंजर की सेनाओं ने आनन्दपाल के नेतृत्व में वैह्न्द के पास महमूद गजनवी की सेना से मुकाबला किया था जिसमें संयुक्त सेना पारजित हो गई. 
53.    712 ई. में अरबों द्वारा प्रारंभ किया गया भारत पर आक्रमण का कार्य तुर्कों ने पूरा किया. 
54.    तुर्की आक्रमणों ने अपने व्यापक प्रभाव से सामाजिक, आर्थिक एवं धर्मिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिवर्तनों को जन्म दिया.  
55.            तुर्की शासन व्यवस्था जनजातीय संगठन पर आधरित थी. 
56.            मध्य एशिया के शासक शिहाबुद्दीन मुहम्मद गोरी ने 1192 ई. में उत्तर भारत को जीता. शिहाबुद्दीन मुहम्मद गोरी का प्रथम आक्रमण 1175 ई. में मुल्तान पर हुआ और 1205 ई. तक वह बराबर साम्राज्य-विस्तार अथवा पूर्वविजिट राज्य की रक्षा के लिए भारत पर चढ़ाई करता रहा. उसने 1175-76 ई में मुल्तान और उच्छ पर आक्रमण किया, 1178 ई. में गुजरात परआक्रमण किया और 1191 ई. में पृथ्वीराज चौहान के साथ तराइन की लड़ाई लड़ी. इस युद्ध में शिहाबुद्दीन की सेना के दोनों पार्श्व परास्त हो गए. तथापि तराइन के दूसरे युद्ध (1192 ई.) में पृथ्वीराज की हार हुई और उसके साथ ही एक केन्द्रीय मुस्लिम राजनीतिक व्यवस्था स्थापित हुई, जो बाद तक कायम रही. 
57.            महमूद गजनवी का प्रथम महत्वपूर्ण आक्रमण 1001 ई. में हिन्दूशाही राजवंश पर हुआ. यहाँ की राजधानी वैह्न्द (उदभंडा पुर) थी. हिन्दूशाही वंश का शासक जयपाल था तथा इसका राज्य पंजाब से सिंध तक फैला था. पेशेवर के पास जयपाल ने सनिर्मित चिंताओं में जलकर आत्महत्या कर ली. 
58.          जयपाल के बाद इसका बेटा आनन्दपाल शासक हुआ. 
59.   महमूद गजनवी ने जयपाल ने नाती सुखपाल का धर्म परिवर्तन कराया और उसका नाम नौसादशाह रखा. 
60.     महमूद गजनवी का प्रथम आक्रमण 1000 ई. में भारत के सीमावर्ती छोरों पर हुआ था. 
61.       महमूद गजनवी ने भारत पर कुल 17 बार आक्रमण किया.        

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