1857 की क्रान्ति और अन्य विद्रोह
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| 1857 की क्रान्ति और अन्य विद्रोह |
1. कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व अंतिम पेशवा द्वितीय कदत्रक पुत्र नाना साहब ने किया. इनका वास्तविक नाम धोंदू पन्त था. कानपुर अंग्रेजों के हाथ से 5 जून, 1857 ई. को निकल गया.
2. नाना साहब के मुख्य सहयोगी तात्या टोपे थे जिनका असली नाम रामचन्द्र पांडुरंग था.
3. कानपुर छावनी के जनरल सर ह्यू ह्वीलर की हत्या सत्ती-चौरा नामक स्थान पर कर दी गई.
4. कैम्पबेल के अधीन अंग्रेजी सेना 16 दिसम्बर, 1857 ई. तक कानपुर को वविद्रोहियों से मुक्त करा दिया.
5. बंगाल के नील विद्रोह (1859-60) को भारतीय कृषक वर्ग का प्रथम आम विद्रोह कहा जा सकता है. यह 1857 के विद्रोह के ठीक बाद बंगाल के नदिया जिले के गोविंदपुर गाँव से प्रारंभ हुआ था. हालांकि इसके पूर्व संन्यासी विद्रोह (1763-1800) तथा संथाल विद्रोह (1855-56) का संबंध भी कृषकों से ही था लेकिन नील इन अन्य कृषक विद्रोहों की अपेक्षा अधिक व्यापक एवं जुझारू विद्रोह था.
6. नील विद्रोह दिगंबर विश्वास तथा विष्णु विश्वास के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ.
7. 1860 तक नील आन्दोलन नदिया, पावना, खोलना, ढाका, मालदा, दीनापुर आदि क्षेत्रों में फ़ैल गया.
8. नील बागन मालिकों अत्याचारों का खुल चित्रण दीनबंधु मित्र ने अपने नाटक नील दर्पण में किया है.
9. 1857 की क्रान्ति का प्रारंभ 10 मई को मेरठ से हुआ था. यहाँ की तीससी कैवेलरी रेजिमेंट के सैनिकों ने चर्बीयुक्त कारतूसों को छूने से इंकार कर दिया और खुलेआम बगावत कर दी. अपने अधिकारियों पर गोली चलाई और अपने साथियों को मुक्त करवा कर वे लोग दिल्ली की ओर चल पड़े. जनरल हेविट के पास 2200 यूरोपीय सैनिक थे परन्तु उसने इस तूफान को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया. विद्रोहियों ने 12 मई, 1857 को दिल्ली पर अधिकार कर लिया. लेफ्टिनेंट विलोबी ने जो दिल्ली के शस्त्रागार का कार्यवाहक था, कुछ प्रतिरोध किया परन्तु वह पराजित हुआ. मुगल सम्राट बहादुरशाह द्वितीय को भारत को भारत का सम्राट घोषित किया गया.दिल्ली में विद्रोह की सफलता ने उत्तर और मध्य भारत के कई भागों में सनसनी फैला दी तथा अवध, रूहेलखंड, पश्चिम बिहार तथा उत्तर-पश्चिम प्रान्तों के अनेक अन्य रोगों में भी विद्रोह फ़ैल गया.
10. बिहार के नेता थे – बाबू कुँवर सिंह
11. फैजाबाद के नेता थे – मौलवी अहमद उल्ला
12. बरेली के नेता थे - खान बहादुर खान
13. कानपुर के नेता थे – नाना साहेब
14. दिल्ली के नेता थे – नवाब हमीद अली खां
15. अवध के नेता थे – मौलवी अहमदुल्लह
16. असम के नेता थे – मनीराम दीवान – असम
17. 1857 ई. के विद्रोह की प्रकृति को लेकर विद्वानों में मतभेद है. अधिकांश भारतीय इतिहासकार इसे राष्ट्रीय आन्दोलन स्वीकार करते हैं जो भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ा गया. जबकि अंग्रेज इतिहासकार ने इसे सिपाही विद्रोह, सामंतवादी प्रतिक्रिया, हिन्दू-मुस्लिम षड्यंत्र आदि की संज्ञा दी है.
18. बिहार में शाहाबाद, पटना और गया जिले विद्रोह के प्रमुख केन्द्र थे.
19. पटना डिविजन में पीर अली ने विद्रोह को भड़काने में मदद की.
20. शाहाबाद जिले में विद्रोह का नेतृत्व बाबू कुँवर सिंह ने किया था.
21. इलाहाबाद (प्रयाग) में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व मौलवी लियाकत अली ने किया. यहाँ जून के प्रारंभ में विद्रोह शुरू हुआ था. लियाकत अली को जिले का सूबेदार घोषित कर दिया गया. जनरल नील ने यहाँ के विद्रोह का दमन किया.
22. बेगम हजरत महल ने लखनऊ विद्रोह का नेतृत्व किया.
23. कदम सिंह ने मेरठ में विद्रोह का नेतृत्व किया.
24. खान बहादुर खान ने बरेली में विद्रोहियों का नेतृत्व किया और अपने आप को नवाब घोषित किया.
25. बंगाल के पूरब में मेघालय में जयन्तियां और गारो पहाड़ियों के बीच खासी लोग निवास करते थे. अंग्रेजों के शोषण के विरुद्ध उतिरोत सिंह (तीरथ सिंह खासी विद्रोह का नेतृत्व किया. 1829 ई. से लेकर 1833 ई. तक यह संघर्ष चलता रहा.
26. तीरथ सिंह के अतिरिक्त बारमानिक और मुकुन्द सिंह ने भी इस विद्रोह का नेतृत्व किया.
27. विवाद का प्रारभ खासी क्षेत्र को सिलहट से जोड़ने के लिए सड़क बनाने की अनुमति प्रदान करने से हुई.
28. 1833 में इन लोगों ने आत्म-समर्पण कर दिया और खासी विद्रोह समाप्त हो गया.
29. 1857 ई. का विद्रोह अपने पूर्व के विद्रोह से कहीं अधिक विस्तृत था. इसमें सैनिक एवं और असैनिक दोनों वर्गों ने हिस्सा लिया फिर भी यह विद्रोह असफल रहा.
30. 1857 विद्रोह की असफलता के अन्य महत्वपूर्ण कारण हैं:-
क. देशी नरेशों एवं सामंतो की गद्दारी
ख. निश्चित उद्देश्य का अभाव
ग. सीमित साधन
घ. कृषक वर्ग की उपेक्षा
ङ. अंग्रेजों के अनुकूलन परिस्थियाँ एवं कुशल नेतृत्व का अभाव
31. 1857 के विद्रोह का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम महारानी विक्तोरियों की उद्घोषणा थी. यह उद्घोषणा 1 नवंबर, 1858 को इलाहाबाद में हुए दरबार में लार्ड कैनिंग द्वारा उद्घोषित की गई. इसमें भारत में कंपनी के शासन को समाप्त कर भारत का शासन सीधे क्राउन के अधीन कर दिया गया. इस उद्घोषणा में भारत का शासन सीधे क्राउन के अधीन कर दिया गया. इस उद्घोषणा में भारत ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार पर रोक, लोगों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप न करना, एक समान कानूनी सुरक्षा सबको उपलब्ध कराना शामिल थे. भारतीय रजवाड़ों के प्रति विजय और विलय की नीति का परित्याग कर दिया गया और सरकार ने राजाओं को गोद लेने की अनुमति प्रदान की तथापि अन्य आश्वासन ब्रिटिश शासन द्वारा पूरे नहीं किए जा सकते हैं.
32. लखनऊ (अवध) में विद्रोह का प्रारंभ 4 जून, 1857 को हुआ. विद्रोह का नेतृत्व बेगम हजरत महल ने किया. उन्होंने अपने अल्पव्यस्क बेटे बिरजिस कादिर को नवाब घोषित किया तथा प्रशासन की बागडोर अपने हाथ में ले ली. अंत में 21 मार्च, 1858 को कैम्पबेल ने गोरख रेजिमेंट की सहायता से लखनऊ पर पुन: आधिकार कर लिया.
33. बीर कुँवर सिंह की मृत्यु के बाद उनके भाई अमर सिंह ने दिसम्बर, 1858 तक अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष जारी रखा.
34. 1857 के विद्रोह के दौरान धार्मिक नेताओं के अंसतोष का प्रमुख कारण ईसाई धर्म प्रचारकों की बढ़ती गतिविधियों थी. 1813 में जब ईसाई मिशनरियों को भारत में आने की अनुमति दी गई तब से उनका प्रचार कार्य बहुत बढ़ गया. शिक्षण संस्थाओं में भी ईसाई धर्म का प्रचार होने लगा. 1857 ई. के अकाल के समय अनेक व्यक्तियों को ईसाई बनाया गया. इन सब कारणों से धार्मिक नेताओं में असंतोष फ़ैल गया.
35. 1857 ई. में एक नियम द्द्वारा कारागार में बंदियों को अपने भोजन के बर्तन ले जाने पर रोक लगा दी गई इससे कैदियों में असंतोष फैला.
36. अप्रैल, 1850 ई. में लेक्स लोकी कानून अर्थात धार्मिक अयोग्यता अधिनियम द्वारा हिन्दू रीति-रितिवाजों में परिवर्तन लाया गया.
37. डलहौजी द्वारा गोद लेने की प्रथा का निषेध कर दिया गया जो हिन्दू धर्मशास्त्र के विरुद्ध था.
38. 1857 के विद्रोह में अंग्रेज सेनानायक नाट शामिल नहीं था जबकि कर्नल नील इलाहाबाद के विद्रोह दमन, जनरल ह्यूरोज झाँसी और ग्वालियर के विद्रोह दमन तथा हैवलॉक दमन में शामिल था.
39. 14 सितम्बर, 1857 को अंग्रेजी द्वारा दिल्ली पर अधिकार करने के क्रम में जनरल जॉन निकलन की मृत्यु हुई थी. रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेज जनरल ह्यूरोज से लड़ते हुए 17, जून 1858 को वीरगति को प्राप्त हुई.
