ध्वनि प्रदूषण क्या है? ध्वनि से हानि II Noise pollution II dhvani pradooshan II noise pollution in hindi essay

ध्वनि प्रदूषण क्या है? ध्वनि से हानि II Noise pollution II dhvani pradooshan II noise pollution in hindi essay

   जब ध्वनि का मानवमस्तिष्क एवं श्रवणेद्रियों पर विपरीत प्रभाव पड़ने लगे तो उसे ‘शोर’ कहते हैं. यही ‘शोर’ ध्वनि प्रदूषणप्रदूषण कहलाता है. ‘NOISE’ शब्द ‘NAUSEA’ से बना है.

परिभाषाएँ (Definitions) paribhashaen : 
1.     रोथम हैरी के अनुसार ‘किसी भी स्रोत से निकलने वाली ध्वनि प्रदूषक बन जाती है जब असह्य हो जाती है. 
     2.     जब अवांछित शोर से हमारे अंदर अशांति उत्पन्न होती है तो उसे ध्वनि प्रदूषक कहते है’ शोर या ध्वनि की तीव्रता को ‘डेसिबल’ में नापते हैं. जो ध्वनि के गुणात्मक अंतर को मात्रात्मक आयाम देता है. यह डेसिबल मीटर (Desibal Meta) द्वारा मापी जाती है.

ध्वनि स्रोत  (Sound source) dhvani srot :

ध्वनि की प्रबलता, ध्वनि की प्रबलता (डेसिबल में)
Loudness of sound, dhvani ki prabalata

फुसफुसाहट
10-25
साँस लेना
10
पत्तियों की खडखडाहट
20
धीमी बातीचीत
20-30
घड़ी की टिक-टिक
30
धीमा रेडियो
30-40
वार्तालाप/बातचीत
50-60
ऑफिस
50-60
पुस्तकालय
35-40
हल्का यातायात
70
टेलीफोन की घंटी
70
वेक्यूम क्लीनर
70
प्रिंटिंग प्रेस
80
भारी यातायात
80
मोटर
90-100
साइकिल
105
रेलगाड़ी की सिटी
110
लाउडस्पीकर
110-150
शेर की दहाड़ (12 फीट तक)
105-110
बिजली की कड़क
128
स्टीरियो डिस्को संगीत
110-115
सायरन
150
  
   

ध्वनि प्रदूषक के मुख्य कारक/ ध्वनि प्रदूषण के स्रोत (Sources of noise pollution) dhvani pradooshan ke srot

ध्वनि प्रदूषण के मुख्यदो स्रोत है :

a.     प्राकृतिक स्रोत natural source 
b.     मानवीय या कृत्रिम स्रोत human source
a.  प्राकृतिक स्रोत prakritik srot 
क. आँधी 
ख.तेज वर्षा 
ग.  तूफ़ान 
घ.  भूकंप 
ङ.   बिजली की कड़कड़ाहाट 
च.  ज्वालामुखी विस्फोट 
छ. बादलों का गर्जन 
b.  मानवीय स्रोत manviy srot 
क. रेडियो, टी. वी., टेप-रिकार्डर, ट्रांजिस्टर, डिस्को आदि. 
ख.हारमोनियम, ढोलक, तबला, घुंघरू, मंजीरा, गिटार. 
ग.  मशीनें, सायरन, जेनरेटर, चक्की 
घ.  मिक्सी, प्रेशरकुकर, वैक्यू क्लीनर, एयर कंडीशनर्स, वाशिंग मशीन, कूलर, पंखे 
ङ.   ट्रक, कारे, स्कूटर, मोटर साईकिल, मोपेड, बसें, रेलगाड़ी, हवाई जहाज.विस्फोटक सामाग्री, बम, हथगोले, टैंक, मशीनगन. 
च.  सिनेमाघर, लाउडस्पीकर, माइक 
छ. शहरी भीड़, बाजार की चहल-पहल, भाषण, कक्षा का शोर  ध्वनि प्रदूषण का दुष्प्रभाव/ ध्वनि प्रदूषण से होने वाली बीमारियां (Diseases caused by noise pollution) dhvani pradooshan se hone valee bimariyaan : 
1.  स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभाव :- 
a.  शारीरिक थकान 
b.  कान का पर्दा फटना 
c.   कम सुनाई देना 
d.  कान में सीटी जैसी आवाजों का आना 
e.  कान सुन्न हो जाना 
f.    बिल्कुल सुनाई न देना 
g.  रक्तचाप (B.P) बढ़ना 
h.  हृदय गति बढ़ना 
i.     दिल का दौरा 
j.     पाचन-तंत्र की गड़बड़ी 
k.  अल्सर (पाचन तंत्र की गड़बड़ी से) 
l.     सिरदर्द 
m.          चक्कर आना घबराहट 
n.  जी मिचलाना, थकान 
o. स्वर यंत्र में सूजन आना 
p.  तेज शोर में जोर लगाकर बोलने से गले में खराश  
q.  आँख की पुतली का छोटा होना 
r.    रंग पहचाने की क्षमता में कमी रात्रि में दृष्टि क्षमता में कम

s.   अनिद्रा 
t.    हार्मोन डिसबैलेंस 
u.  कब्ज

2.  मनोवैज्ञानिक प्रभाव 
a.  चिड़चिड़ापन 
b.  अशांति 
c.   बेचैनी 
d.  मानसिक उत्तेजना 
e.  बात-बात पर चीखना 
f.    एकाग्रता में कमी 
g.  कार्यक्षमता में कमी 
3.  सामाजिक दुष्प्रभाव : 
a.   कार्यक्षमता घटने से रोजी रोटी को नुकसान 
b.   आर्थिक संकट 
c.    समाज में अव्यवस्था फैलना 
d.   आर्थिक अभाव में पीड़ित व्यक्ति के आश्रित असामाजिक तत्वों से मिलकर समाजविरोधी गतिविधियों में लग जाते हैं. 
4.  शोर मापन :- 
ध्वनि तीव्रता का मापन ‘डेसिबल’ में किया जाता है. ध्वनि तीव्रता मापन के लिए निम्नलिखित यंत्रों का प्रयोग करते हैं : 
a.     ऑक्टेव बैण्ड एनालाइजर 
b.     श्रव्यमापी यंत्र 
ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित कानून : 
    1.            इंगलैण्ड में शोर रोकथाम अधिनियम 1960 बना जिसमें रात्रि 9 बजे से प्रात: 8 बजे तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर रोक है. 
    2.            अमेरिका में ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम के लिए शोर नियंत्रण अधिनिमय, 1972 है. 
    3.            जापान में मूल कानून में प्रदूषण नियंत्रण के सन्दर्भ में पर्यावरणीय जागृति और नियंत्रण हेतु प्रावधान है. 
    4.            इन्डियन पैनल कोड के सैक्सन 268 अथवा क्रिमिनल प्रोसीजर कोड 1973 के दसवें अध्याय में सैक्शन 133 तथा ग्यारहवें अध्याय के सैक्शन 144 में शोर के सन्दर्भ में जन उपद्रव रोकने के सुझाव हैं. 
    5.            राज्य स्तर पर मध्य प्रदेश ने ‘संगीत और शोर नियंत्रण अधिनियम, 1950’ बनाया गया. 
    6.            बिहार सरकार ने ‘ध्वनि विस्तारक यंत्र को बजाने पर नियंत्रण अधिनिय बनाया गया. राजस्थान सरकार ने शोर नियंत्रण अधिनियम, 1963 बनाए गए. 
    7.            पर्यावरण संरक्षण अधिनियम में ऐसी व्यवस्था रखी गई है जिसमें किसी भी प्रकार के प्रदूषण के सन्दर्भ में नियम बनाए जा सकते हैं और उन पर विधि संगत कठोरता से पालन किया जा सकता है.
   8.         माननीय सर्वोच्च न्यायालय की (ध्वनि प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश) न्यायमूर्ति त्रय, डॉ. ए. एस. आनन्द, आर. सी. लाहोटी एवं अशोक भान की खण्डपीठ ने 27 सितम्बर को भारतवर्ष के सभीजिलाधीशों को आदेश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि दशहरा, दीवाली और अन्य बड़े पर्वो पर पटाखे केवल शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक ही बजाए जाएँ और इसके बाद नहीं क्योंकि शांतिपूर्ण निद्रा मौलिक अधिकार हैं. 
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