विदेश नीति क्या
है, भारत की विदेश नीति, भारत
के विदेश नीति के निर्धारक तत्व (indian foreign policy) indian
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भारत की विदेश नीति के मूल सिद्धांत (bharat
ki videsh niti in hindi pdf ) ब्रिटिश शासन काल में ही विकसित होए गए थे. (bharat
ki videsh niti notes) 1938 में कांग्रेस ने हरिपुरा अधिवेशन (भारत
की विदेश नीति PDF) में प्रस्ताव पास किया जिसमें इस बात पर
बल दिया गया कि भारत के लोग अपने पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण और मैत्रीपूर्ण ढंग
से रहना चाहते हैं. वह विभिन्न राज्यों के मतभेदों के सभी कारणों को समाप्त कर
स्थायी रूप से विश्व शान्ति स्थापित करना चाहते हैं. उन्होंने साम्राज्यवाद के
प्रति विरोध व्यक्त किया क्योंकि यह जनता के एक वर्ग द्वारा दूसरे वर्ग के शोषण पर
आधारित है. भारत की विदेश नीति के उपरोक्त सिद्धांतों की पंडित नेहरू ने अपने 2
सितम्बर 1946 के भाषण में व्याख्या की. बाद के वर्षों में भी भारत की विदेश नीति
के अनेक सिद्धान्तों की और व्यख्या की गई अथवा उसमें परिवर्तन किए गए.
features of indian foreign policy upsc, bharat ki videsh niti ke nirdharak tatva, भारत की विदेश नीति का लक्ष्य, भारत की विदेश नीति की विशेषताएं, विदेश नीति के महत्वहम कह सकते हैं कि भारत की विदेश नीति इस समय निम्न सिद्धान्तों पर टिकी हैं:-
1. अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति तथा सुरक्षा को बढ़ावा देना.
2. विद्दमान शक्ति गुटों से अलग रहकर गुटनिरपेक्ष बने रहना ताकि भारत लड़ाई को रोकने और विश्व शान्ति को बढ़ावा देने में एक सक्रिय भमिका निभा सके.
3. उपनिवेशवाद का साम्राज्यवाद का विरोध करना तथा उन लोगों कसे सहानुभूति रखना व समर्थन करना जो अब भी उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवादी शासन व्यवस्था को शिकार हैं.
4. जातिवाद का विरोध करना क्योंकि यह बंधुत्व की भावना के विरुद्ध हैं तथा इससे भेदभावपूर्ण प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिलता हैं. भारत ने सदैव समाज के के वर्ग को विशेधिकार प्रदान किए जाने का विरोध किया है.
5. विभिन्न विचारधाराओं में विश्वास रखने वाले राज्यों के साथ सहअस्तित्व तथा सहयोग को बढ़ावा देना. भारत ने पंचशील के पांच सिद्धान्तों एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता और प्रभुता का सम्मान करने; एक-दूसरे पर आक्रमण न करने; एक दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना,, परस्पर हित और समानता की भावना को बढ़ावा देना तथा शांतिपूर्ण सहअस्तित्व की भावना को विकसित करना.
6. भले ही भारत ने सभी देशों के साथ सहयोग को बढ़ाने पर बल दिया है परन्तु भारत का एशिया के प्रति विशेष झुकाव है. भारत ने एशिया के अन्य देशों के साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित करने का प्रयास किया है.
7. भारत ने राष्ट्रमंडल के सदस्यों के साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित करने का प्रयास किया है. भारत द्वारा गणराज्यीय व्यवस्था अपनाए जाने के बावजूद भारत राष्ट्रमंडल का सदस्य बना हुआ है. अनेकों बार भारत बार-बार उत्तेजित की जाने वाली घटनाओं के बावजूद राष्ट्रमंडल से अलग नहीं हुआ.
8. शान्ति का अग्रणी होने के नाते भारत ने सदैव संयुक्त राष्ट्रसंघ में आस्था दर्शायी है और झगड़ों को शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाने पर बल दिया है. संयुक्त राष्ट्रमंडल के निर्णयों को कार्यान्वित करने के उद्देश्य से भारत ने सैनिक और अन्य व्यक्तियों की सेवाएँ उपलब्धता कराई.
9. भारत ने नि: शस्त्रीकरण पर बल दिया है ताकि विद्दमान तनाव को कम किया जा सके और हथियारों पर होने वाले खर्चे को रोका जा सके ताकि साधनों का प्रयोग विकास और अन्य उपयोगी कार्यों पर किया जा सके.
10. अनन्त: भारत की विदेश नीति नैतिकता के सिद्धान्तों पर टिकी है. भारत ने सदैव इस बात पर बल दिया है कि न केवल हमारे उद्देश्य महान होने चाहिए और उन्हें प्राप्त करने के साधन भी घर्मनिष्ठ होने चाहिए.