राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत directive principles of state policy II राज्य के नीति निर्देशक तत्व II directive principles of state policy in hindi II राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों के महत्व क्या है II directive principles of state policy upsc II Directive Principles


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राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत directive principles of state policy


राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत जो संविधान निर्माताओं की महत्वाकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करते हैं, संविधान के भाग – IV में दिए गए हैं. इसके अतिरिक्त संविधान के कुछ अन्य अनुच्छेद जैसे कि 335, 350A और 351 भी इन्हीं से संबंधित हैं. नीति निर्देशक सिद्धांतों का मुख्य उद्देश्य लोकतंत्र को वास्तविक बनाने के लिए सामाजिक और आर्थिक आधार प्रादान करना है. इन सिद्धांतों को अदालतों के माध्यम से लागू नहीं कराया जा सकता. यह केवल राज्य को निर्देश के रूप में हैं और नीति निर्धारित करते समय सरकार को इन्हें ध्यान में रखना पड़ता है.
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राज्य के नीति निर्देशक सिद्धान्तों को निश्चित उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए जारी किए गए सकारात्मक आदेश है परन्तु मौलिक अधिकार प्रशासन को कुछ विशेष कार्य करने से रोकते हैं.
नीति निर्देशक सिद्धांतों को न्यायपालिका के माध्यम से लागू नहीं किया जा सकता है. यदि प्रशासन उनकी अवहेलना अथवा उल्लंघन करता है तो न्यायपालिका कोई कार्यवाही नहीं कर सकती. इसके विपरीत मौलिक अधिकारों को न्यायालय के माध्यम से लागू कराया जस सकता है.
नीति निर्देशक सिद्धांत मौलिक अधिकारों की तुलना में निम्न कोटि के माने जाते हैं. यदि नीति निर्देशक सिद्धान्तों और मौलिक अधिकारों में टकराव हो जाता है तो मौलिक अधिकार अधिक सशक्त माने जाते हैं.
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मुख्य नीति निर्देशक सिद्धांत : important directive principles)
नीति निर्देशक सिद्धान्तों को मुख्यालय निम्न तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है :-

1.  आर्थिक एवं सामाजवादी सिद्धांत (economic and socialist principles) :-


इन सिद्धान्तों का मुख्य उद्देश्य सामजिक और आर्थिक न्याय प्रदान करना व देश में एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है. यह सिद्धांत राज्य को आदेश देते हैं कि :
a.     सभी नागरिकों को जीविका के उपयुक्त साधन प्रदान करना. धन तथा उत्पादन के साधनों के केन्द्रीकरण को रोकना और धन का भौतिक साधनों का न्याय संगत बंटवारा करना.
b.     पुरुषों और स्त्रियों दोनों को समान कार्य के लिए समान वेतन दिलाना.
c.      सभी कर्मकारों को शिष्ट जीवनस्तर और अवकाश प्रदान करना.
d.     शिशुओं और युवाओं के शोषण को रोकने और उन्हें आवश्यक अवसर व सुविधाएँ प्रदान कराना

2.   गांधीवादी सिद्धांत (Gandhian principles) :


गाँधीवादी पुनर्निमाण कार्यक्रम के प्रतीक हैं
इसमें शामिल सिद्धांत है:
a.     ग्रामीण पंचायतों के संगठन के लिए कदम उठाना तथा उन्हें स्वायत शासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने योग्य बनाना.
b.     समाज के पिछड़े वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देना. c.      कुटीर उद्दोगों के विकास को प्रोत्साहन देना
d.     नशीली दवाइयों और शराब इत्यादि के सेवन पर पतिबंध लगाना. गायों और बछड़ों और अन्य दुधारू जीवों के वध को रोकना.

3.   उदारवादी सिद्धांत liberal principles : उदारवाद के प्रमुख सिद्धांतों की विवेचना कीजिए :-


      विचारधारा पर आधारित हैं और निम्न सिद्धान्तों पर बल देते हैं :
a.     भारत के समस्त राज्य क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान दीवानी सहिता.b.     14 वर्षों की आयु तक सभी बच्चों के लिए अनिवार्य और निशुल्क शिक्षा.
c.      न्यायपालिका और कार्यपालिका का पृथक्करण.d.     आर्थिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों को निशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करता ताकि कोई भी नागरिक आर्थिक तथा अन्य अभावों के कारण न्याय पाने से वंचित न रह जाए.
e.     उद्दोगों के प्रबंध में कर्मकारों को भाग देना.
f.       पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन और वन व वन्य जीवों की रक्षाओं.
g.     राष्ट्रीय महत्त्व के संस्मारकों, स्थानों और वस्तुओं का संरक्षण.
h.     विदेशों क्षेत्र में यह सिद्धांत अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा, राष्ट्रों के बीच न्यायसंगत और सम्मानपर्ण संबंध बनाएं रखना, अन्तर्राष्ट्रीय कानून और संधि-बाधाओं का पालन और अन्तर्राष्ट्रीय विवादों को मध्यस्थता द्वारा निपटानाइत्यादि.     

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