रेदियोसक्रियता Radioactivity II रेडियो सक्रियता क्या है What is radio activity II what is radioactivity in chemistry


रेदियोसक्रियता Radioactivity II रेडियो सक्रियता क्या है What is radio activity II what is radioactivity in chemistry


Radioactivity

                     रेडियोसक्रियता Radioactivity


रेडियोसक्रियता Radioactivity :- प्रकृति में पाने जाने वाले वे तत्व जो स्वत: विखंडित होकर कुछ अदृश्य किरणों का उत्सर्जन करते रहते हैं, रेडियोसक्रिय तत्व कहलाते हैं तथा यह घटना रेदियोसक्रियता कहलाती है. रेडियोसक्रिय तत्वों से निकलने वाली अदृश्य किरणें रेडियोसक्रिय किरणें कहलाती है.

रेडियो सक्रियता की खोज किसने की : Who discovered radio activity, radio sakriyata ki khoj kisane ki

रेडीयसक्रियता की खोज discovered radio activity, rediyo sakriyata ki khoj – 1896 ई. में फ़्रांस के वैज्ञानिक हेनरी बेकरेल ने सर्वप्रथम रेडियोसक्रियता का पता लगाया. हेनरी बेल ने पाया कि युरेनियम लवणों से कुछ अदृश्य किरणें स्वत: उत्सर्जित होते हैं. प्रारंभ में इन अदृश्य किरणों को बेकरेल किरणें कहा गया. 1898 ई. में मैडम क्यूरी तथा उनके पति पियरे क्यूरी ने यह ने यह सुझाव दिया कि युरेनियम और इसके यौगिकों से बेकरेल किरणों का निकलना एक परमाणुजनित क्रिया है. वर्तमान में लगभग 40 प्राकृतिक रेडियोसक्रिय समस्थानिक एवं अनेक रेडियोसक्रिय तत्व ज्ञात है.

रेडियोसक्रियता के प्रकार types of radioactivity, radio sakriyata ke prakar

रेडियोसक्रियता के प्रकार radioactivity ke prakar  – किसी तत्व के रेडीयोसक्रिय परिवर्तन में परमाणु के नाभिक का विखण्डन होता है. इसका कारण यह है कि रेडियोसक्रिय तत्वों परमाणु अस्थायी होते हैं. ऐसे परमाणु के नाभिक में न्यूट्रानों की संख्या अत्यधिक होती है.

रेडियों सक्रियता दो प्रकार (types of radioactivity with examples)  


(Radioactive unit) की होती हैं :- प्राकृतिक और कृत्रिम

1.   प्राकृतिक रेडियोसक्रियता (Natural Radioactivity) prakrtik rediyosakriyata – रेडियोसक्रिय तत्वों के परमाणु के नाभिक स्वतः विखंडित होकर अन्य (रेडियो सक्रियता की इकाई) तत्वों के परमाणुओं में परिवर्तित होते रहते हैं. यह क्रिया स्वाभाविक रूप से चलती रहती है तथा इसमें रेडियोसक्रिय किरणों का उत्सर्जन होता है,इसे प्राकृतिक रेडियोसक्रियता कहते हैं. उदहारण के लिए – युरेनियम, रेडियम थोरियम आदि तत्वों का विखण्डन स्वयँ होता रहता है. अत:  इन तत्वों में पायी जाने वाली रेडीयसक्रियताप्राकृतिक रेडीयसक्रियNatural Radioactivity कहलाते हैं. 
2.   कृत्रिम रेडियोसक्रियता (Artificial Radioactivity)  कृत्रिम रेडियोसक्रियता वः प्रक्रिया है, जिसके द्वारा कोई तत्व कृत्रिम तरीके से किसी ज्ञात तत्व के रेडीयसक्रिय समस्थानिक में परिवर्तन किया जाता है. इस प्रक्रिया में उस तत्व पर तीव्र वेग वाले कणों (प्रोट्रान, ड्यूट्रान, अल्फ़ा कण आदि) से प्रहार किया जाता है. उदहारण के लिए मैग्नीशियम, जो एक स्थायी तत्व हैं, पर अल्फ़ा कणों (2He4) से प्रहार करने पर के अस्थायी और रेडियोसक्रिय तत्व सिलिकन (14Si27) बनता है तथा न्यूट्रान (on1) मुक्त होता है, फिर यह 4Si27 स्वतः परिवर्तित होकर स्थायी एलुमिनियम में बदल जाता है. 
3.   रेडियोसक्रिय किरणें radioactive raysरेडियोसक्रिय पदार्थ से निकलने वाले अदृश्य किरणों को रेडियोसक्रिय किरणें कहते हैं. रेडीयसक्रिय पदार्थों से निकलने वाली इन किरणों को रदरफोर्ड ने 1902 ई. में चुम्बकीय तथा विद्दुत क्षेत्र के धन ध्रुव की ओर मुड़ जाती है तथा अन्य किरणों पर चुम्बकीय एवं विद्दुत क्षेत्र का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है और ये सीधे गमन करती हुई निकल जाती है. रदरफोर्ड ने इन किरणों को क्रमश: अल्फ़ा-किरण, बीटा किरण तथा गामा किरण कहा.रेडीयोसक्रिय विखण्डन  (radioactive fission) radioactive fission productsरेडियोसक्रीय तत्वों के नाभिक से रडियोसक्रिय तत्वों के स्वतः उत्सर्जन की प्रक्रिया को रेडियोसक्रिय विखण्डन या रेडियोसक्रिय क्षय कहा जाता है. चूँकि यह क्रिया स्वाभाविक रूप से स्वतः होती है, अत: इसे प्राकृतिक विखण्डन भी कहते हैं. इस क्रिया में अल्फा, बीटा और गामा किरणों का उत्सर्जन होता है.

1931 ई. में साडी, फाजांस और रदरफोर्ड ने रेडीयसक्रिय विखण्डन से संबंधित सिद्धांत का प्रतिपादन किया. इनके अनुसार :

a.    रेडीयसक्रिय तत्वों के परमाणु अस्थायी होते हैं, जो स्वतः विखंडित होकर नये तत्वों में परिवर्तित होते रहते हैं. 
b.    अल्फ़ा कण और बीटा कण रेडियोसक्रिय तत्व के परमाणु के नाभिक से उत्पन्न होते हैं. 

        c.     रेडियोसक्रिय परिवर्तन दो प्रकार के होते हैं : 

i.                   अल्फ़ा-परिवर्तन अल्फ़ा-कण के निकलने से होने वाले परिवर्तन को अल्फ़ा परिवर्तन कहते हैं.ii.                बीटा-परिवर्तनबीटा कण के निकलने से होने वाले परिवर्तन को बीटा-परिवर्तन कहते हैं.औसत आयु – विखण्डन स्थिरांक के व्युत्क्रम को रेडियसक्रिय पदार्थ कीऔसत आयु कहते हैं.रेडियोसक्रियता की ईकाई (रेडियोसक्रियता की इकाई क्या है) What is the unit of radioactivity – रेडीयसक्रियता की इकाई को क्यूरी कहते हैं. किसी रेडियोसक्रिय पदार्थ का वह परिणाम जिसमें प्रति सेकेण्ड 3.70X1010 विखण्डन होते हैं, क्यूरी कहलाता है. 
रेडियो आइसोटोप रेटिंग (Radio isotope dating)  – किसी रेडियोसक्रिय समस्थानिक की मात्रा का किसी पत्थर के नमूने, काष्ठ या जैव अवशेष में मापन करके उनके आयु का निर्धारण करना रेडियो आइसोटोप डेटिंग कहलाता है. कार्बन डेटिंग रेडियो आइसोटोप डेटिंग का एक महत्वपूर्ण उदारहण है. कार्बन डेटिंग के द्वारा जीवाश्मों, मृत पेड़ पौधे आदि की आयु का अंकन किया जाता है. निर्जीव वस्तुओं जैसे – पृथ्वी, पुरानी चट्टानों आदि की आयु ज्ञात करने के लिए युरेनियम का प्रयोग किया जाता है. इसे युरेनियम द्वारा आयु अंकन कहते हैं. अधिक पुरानी चट्टानों के लिए पोटैशियम-आर्गन डेटिंग विधि भी आधिक उपयुक्त सिद्ध हुई है. मृत पेड़ पौधे और जानवरों का आयु निर्धारण उनमें 6C14 और 6C12 का अनुपात ज्ञात करके किया जाता है. 

रेडियोसक्रिय समस्थानिकों की उपयोगिता (Use of radioactive isotopes) – वर्तमान समय में रेडियोसक्रिय समस्थानिक की उपयोगिता काफी बढ़ गई है एवं इनका उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जा रहा है. रेडीयोसक्रिय समस्थानिकों के कुछ प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं –

i.                  रेडियोसक्रिय समस्थानिकों का उपयोग मृत पेड़-पौधों, जानवरों तथा पत्थर के पुराने नमूने की आयु ज्ञात करने में किया जाता है. इस विधि को रेडियो आइसोटोप डेटिंग कहते हैं. 
ii.               रेडियों समस्थानिक का उपयोग औषधीय ट्रेसर के रूप में किया जाता है. इस विधि द्वारा मानव शरीर में किसी प्रकार के ट्यूमबर का पता लगाया जाता है. जमीन के अंदर बिछाई गई जल पाइप नालियों, गैस पाइप नालियों तथा तेल पाइप नालियों में किसी प्रकार के छेद या रिसाव का पता लगाने के लिए रेडियोसक्रिय समस्थानिकों का उपयोग होता है. 
iii.            रेडियोसक्रिय समस्थानिक का उपयोग पौधों में उर्वरक की क्रिया जानने में किया जाता है. रासायनिक     

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